खरीदी के तरीके पर टकराव:15 दिन में पहला और उसके बाद हर रोज जारी होगा मॉडल रेट

सोयाबीन मार्केट में आना शुरू हो गया है। सरकार की भावांतर स्कीम को लेकर किसानों का विरोध जारी है। इन सबके बीच शासन ने स्पष्ट किया है कि जिस भी किसान की उपज एफएक्यू (साफ और औसत गुणवत्ता) की है, उसे समर्थन मूल्य (एमएसपी) के बराबर राशि जरूर मिलेगी। किसानों का तर्क है कि जब पूर्व में यह स्कीम फेल हो चुकी है, तो इसे किसानों पर क्यों थोपा जा रहा है।
इधर, भावांतर के लिए मॉडल रेट जारी करने की रूपरेखा बन गई है। पहला रेट 15 दिन में दिया जाएगा। इसके बाद हर दिन मॉडल रेट जारी होगा। बता दें कि पिछले साल करीब 52 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था। इसमें से 7 लाख टन सोयाबीन किसानों ने समर्थन मूल्य पर सरकार को बेचा था। इस बार 20 लाख टन से अधिक पर भावांतर का पैसा देने की बात की जा रही है।
आज से शुरू होंगे सोयाबीन खरीदी के रजिस्ट्रेशन
प्रदेश सरकार की भावांतर भुगतान योजना के तहत सोयाबीन खरीदी के रजिस्ट्रेशन 3 अक्टूबर से शुरू होने जा रहे हैं। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 17 अक्टूबर तक चलेंगी। 24 अक्टूबर से प्रदेश में सोयाबीन खरीदी शुरू की जाएगी, जो 15 जनवरी तक चलेगी। इस साल केंद्र सरकार ने सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5328 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है।
15% पैसा केंद्र का , मॉडल रेट कम हुआ तो भरपाई करेंगे
कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक वर्णवाल का कहना है कि भावांतर योजना में किसी भी किसान को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। समर्थन मूल्य 5328 रुपए प्रति क्विंटल का 15% तक की राशि 799 रुपए केंद्र की गाइडलाइन के तहत मिलेगी। इसके बाद भी मॉडल रेट कम होता है, तो राज्य सरकार अपने पास से उसकी भरपाई करेगी। इसे लेकर जो भ्रम या मिथक फैलाया जा रहा है, वह सही नहीं है।
सिर्फ 40% की ही विक्रय बाध्यता नहीं होगी
किसान अपने सोयाबीन के रकबे और उत्पादकता के आधार पर मंडी में सोयाबीन का भावांतर योजना में लाभ लेंगे। यह भी स्पष्ट है कि सिर्फ 40% की ही विक्रय बाध्यता नहीं है। इससे ज्यादा मात्रा पर भी राज्य शासन भावांतर की राशि का लाभ कृषकों को उनके खाते में देगी। व्यापारी द्वारा कार्टल बनाकर रेट कम करने की कोशिश को भी रोका जाएगा। हर मंडी में एक नोडल अधिकारी तैनात कर दिया गया है। निगरानी कैमरे से होगी।
24 चीजों की एमएसपी तय है तो सरकार कंफ्यूज क्यों है
भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना का कहना है कि जब 24 चीजों की एमएसपी तय है, तो खरीदने में सरकार को दिक्कत क्या है। क्यों कंफ्यूजन है। पिछली बार भावांतर योजना फेल हो चुकी है। आज भी भावांतर का करीब ढाई सौ करोड़ रुपए किसानों का बाकी चल रहा है। भावांतर योजना का किसान इसीलिए विरोध कर रहे हैं।
यदि किसान को भरोसा मिल जाए कि उसे एमएसपी के बराबर उपज का मूल्य मिलेगा, तो दिक्कत नहीं होगी। दरअसल, सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही। आंजना के मुताबिक यदि मार्केट में व्यापारी ने भाव नीचे कर दिए, तो कौन देखेगा। पहले भी यही अफसर थे, जब भावांतर का रिजल्ट ठीक नहीं था। अभी यही अधिकारी हैं।
सरकार की मंशा दिख रही है कि वह सोयाबीन में भावांतर का प्रयोग करना चाहती है। सफल हुआ तो बाद में बाकी फसलों पर लागू करेगी। किसान परेशान है क्योंकि अभी ही मंडियों में सोयाबीन का प्रति क्विंटल भाव 4000 रुपए से लेकर 4200 रुपए चल रहा है। इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा?





