आरक्षक भर्ती गड़बड़ी…नई नियुक्तियों पर हाईकोर्ट की रोक

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में 6,000 पदों पर आरक्षकों की भर्ती हो रही है। अब तक लगभग 2500 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र बांटे जा चुके हैं। हाईकोर्ट के जस्टिस पीपी साहू ने अब नई नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक जॉइनिंग लेटर जारी न किए जाएं।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका पर अंतिम फैसला आने या अगली सुनवाई तक विभाग कोई भी नई नियुक्ति आदेश जारी नहीं करेगा। सरकार 2 सप्ताह में जवाब दे। हालांकि सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि शिकायत केवल एक सेंटर तक ही सीमित है। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी।
अब जानिए याचिका में अभ्यर्थियों ने क्या आरोप लाए हैं ?
दरअसल, आरक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी को लेकर सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ और मुंगेली के अभ्यर्थी मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद, गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्वनी कुमार यादव और ईशान सहित अन्य ने मिलकर अलग-अलग याचिकाएं दायर की है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान फिजिकल टेस्ट को बेहद भ्रष्ट तरीकों से संपन्न कराया गया। फिजिकल टेस्ट में डेटा रिकॉर्डिंग का काम सरकार ने आउटसोर्स पर नियुक्त टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा था। निष्पक्षता का पालन नहीं किया गया। कई अभ्यर्थियों से पैसों के लेन-देन किया गया।
बिलासपुर एसएसपी के पत्र को बनाया आधार
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि फिजिकल टेस्ट में बड़े पैमाने पर धांधली हुई थी। इसका सबसे बड़ा सबूत 19 दिसंबर, 2024 को बिलासपुर के SSP और सिलेक्शन कमेटी के चेयरमैन का लेटर है। रायपुर पुलिस हेडक्वार्टर को लिखा था। उन्होंने फिजिकल टेस्ट के दौरान पाई गई गड़बड़ियों की आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट दी थी।
याचिका में यह भी बताया गया कि भर्ती पूरे राज्य के लिए एक ही सेंट्रलाइज्ड विज्ञापन के जरिए की जा रही है। सभी जिलों में फिजिकल टेस्ट एक ही आउटसोर्स कंपनी से कराया गया। इस बात की पूरी संभावना है कि बिलासपुर की तरह ही राज्यभर के दूसरे सेंटर्स पर भी इसी तरह की गड़बड़ियां हुई हों।
129 अभ्यर्थियों को गलत तरीके से फायदा, सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि जांच रिपोर्ट से पता चला है कि बिलासपुर के पुलिस सुपरिटेंडेंट ने माना है कि फिजिकल टेस्ट के दौरान गंभीर गड़बड़ियां हुईं और गलत डेटा रिकॉर्ड किया गया।
इसके अलावा टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने फिजिकल टेस्ट से संबंधित CCTV फुटेज मैनेज किया था, उसे भी डिलीट कर दिया गया था। जांच में 129 ऐसे उम्मीदवारों के नाम सामने आए, जिन्हें गलत तरीके से फायदा पहुंचाया गया। इन्हें ज्यादा नंबर दिए गए। काबिल उम्मीदवार मेरिट के आधार पर चुने जाने चाहिए थे, उन्हें नहीं चुना गया।
पुलिस भर्ती नियम 2007 का उल्लंघन बताया
याचिका में यह भी कहा गया कि पुलिस भर्ती प्रक्रिया नियम 2007 के नियम 7 में स्पष्ट प्रावधान है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर नई प्रक्रिया कराई जानी चाहिए। ऐसे में चयन प्रक्रिया का समापन, अंतिम सूची जारी करना और नियुक्ति आदेश प्रकाशित करना नियमों के खिलाफ और गैरकानूनी है।





