लिगेसी वेस्ट निपटारे पर अब परिषद लेगी फैसला, एमआईसी ने दूसरी बार टेंडर मंजूरी से किया इंकार

भोपाल, आदमपुर खंती में पड़े करीब 6 लाख टन से ज्यादा लिगेसी वेस्ट के निपटारे पर अब नगर निगम परिषद फैसला करेगी। महापौर मालती राय की अध्यक्षता में हुई एमआईसी बैठक में लगातार दूसरी बार इस टेंडर को मंजूर करने से इंकार कर दिया गया और इसे परिषद में रखने का निर्णय लिया गया।

निगम ने करीब 6 लाख टन कचरे के निपटारे के लिए 33 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया था, लेकिन सबसे कम बोली 55 करोड़ रुपए आई, जो तय राशि से करीब 70 प्रतिशत अधिक है। वित्तीय नियमों के अनुसार 20 प्रतिशत से अधिक दर आने पर एमआईसी सीधे टेंडर मंजूर नहीं कर सकती।

इस मामले में 5 मार्च की एमआईसी बैठक में राज्य के महाधिवक्ता से राय लेने का निर्णय लिया गया था। महाधिवक्ता ने बताया कि अन्य राज्यों में लिगेसी वेस्ट का निपटारा 1200 से 1500 रुपए प्रति टन की दर से हो रहा है, जबकि भोपाल में यह दर करीब 1100 रुपए प्रति टन बैठ रही है। इसके आधार पर एमआईसी टेंडर मंजूर कर सकती है। इसके बावजूद सदस्यों ने भविष्य में विवाद की आशंका जताते हुए मामला परिषद में रखने का निर्णय लिया।

खंती के आसपास के इलाके में पानी और हवा प्रभावित

आदमपुर खंती के आसपास जमीन के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाए गए हैं। नगर निगम द्वारा लिए गए सैंपल की जांच में यह सामने आया कि पानी पीने योग्य नहीं रह गया है। यहां टैंकर से पानी सप्लाई किया जा रहा है। आसपास की फसलों को भी नुकसान पहुंच रहा है और हवा प्रदूषित हो चुकी है।

एमआईसी में ये प्रस्ताव भी मंजूर

एमआईसी की बैठक में कुल 13 एजेंडा बिंदुओं में से 12 को मंजूरी दी गई। इनमें पीएम आवास योजना की प्लॉट नंबर 47 और 49 परियोजना की निविदा निरस्त करना, बागमुगालिया परियोजना के एलआईजी और ईडब्ल्यूएस आवासों की दर संशोधन, हिनोतिया आलम, कलखेड़ा, रासलाखेड़ी, 12 नंबर बस स्टॉप और गंगा नगर–श्याम नगर परियोजनाओं के कार्यों के लिए समयावृद्धि के प्रस्ताव शामिल हैं।

इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत 12 टन क्षमता के गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन निर्माण की समय सीमा बढ़ाने और वर्ष 2026-27 में गन्ना चर्खी व्यवसायियों से अस्थायी अनुमति शुल्क वसूली के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के निगम बजट को भी औपचारिक स्वीकृति दे दी गई।

कचरा निपटान में लगातार देरी

परिषद भी टेंडर मंजूर नहीं करती है तो निगम को दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी। आदमपुर खंती में 2018 से कचरा डंप किया जा रहा है। उस समय दावा किया गया था कि यहां भानपुर जैसा कचरे का पहाड़ नहीं बनेगा, लेकिन अब स्थिति गंभीर हो चुकी है। मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है। कोर्ट ने पिछले महीने 15 दिन के भीतर टेंडर मंजूर करने और 330 दिन में कचरे के निपटारे और जिम्मेदारी की गाइडलाइन भी तय करने को कहा है।

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