‘ग्रीन कवर को नष्ट करना विकास नहीं विनाश ‘, बिना अनुमति के एक भी पेड़ नहीं काटे जाएंगे, एमपी हाईकोर्ट ने लगाई लताड़

जबलपुर: एमपी हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि ग्रीन कवर को नष्ट करना विकास नहीं विनाश है। खुशनसीब हैं वो जो मध्य प्रदेश में रहते हैं। पेड़ों को काटने की अनुमति देने वाले अधिकारी प्रदूषित प्रदेश में जाकर रहें, तब उन्हें इसका महत्व पता चलेगा। विकास के नाम पर दशकों पुराने पेड़ काटना विनाश है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और विनय सराफ की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए सरकार को निर्देशित किया है कि एनजीटी के निर्देश पर गठित 9 सदस्यीय कमेटी की बिना अनुमति के बिना एक भी पेड़ नहीं काटा जाए। इसके अलावा कितने पेड़ काटे गए हैं और कितने का प्रत्यारोपण किया गया है, इस संबंध में जानकारी पेश करें। काटे गए पेड़ों के एवज में कितने गुना पेड़ लगाए जाएंगे, इस संबंध में भी जानकारी पेश करें।

सरकार ने हाईकोर्ट में गलती स्वीकार की

याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ बिना अनुमति पेड़ों के काटने और प्रत्यारोपण की गलती सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में स्वीकार की गयी। सरकार की तरफ से बताया गया कि वन संरक्षण अधिनियम के तहत प्रदेश में ट्री अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। भोपाल में 244 पेड़ों में से 112 को पुनर्स्थापित किया गया है। ट्रांसप्लांटेशन की तस्वीर देकर युगलपीठ ने कहा कि ऐसे पेड़ बचते नहीं है, मर जाते हैं। उन अधिकारियो का नाम बताए, जिन्होने इसकी अनुमति प्रदान की है।

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