यात्रियों की कमी से जूझ रही भोपाल मेट्रो, रोज आठ लाख खर्च कर कमा रही सिर्फ 15 हजार

भोपाल: राजधानी में भोपाल मेट्रो ने अपने व्यावसायिक संचालन का एक महीना पूरा कर लिया है, लेकिन यह अवधि भारी आर्थिक घाटे के रूप में दर्ज हुई है। सुभाष नगर से एम्स तक सात किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो के संचालन पर प्रतिदिन लगभग आठ लाख रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि इससे केवल करीब 15 हजार रुपये की आय हो पा रही है।
21 दिसंबर से शुरू हुआ व्यावसायिक संचालन
भोपाल मेट्रो का कारोबारी संचालन 21 दिसंबर से शुरू किया गया था। पहले दिन यात्रियों में उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोग मेट्रो की सवारी के लिए पहुंचे। शुरुआत में सुबह नौ बजे से शाम 7.30 बजे तक तीन डब्बों वाली एक ट्रेन 17 फेरे लगाती थी। उस समय रोजाना करीब सात हजार यात्री मेट्रो से सफर कर रहे थे।
यात्रियों की संख्या में लगातार गिरावट
हालांकि शुरुआती उत्साह जल्द ही ठंडा पड़ गया। कुछ ही दिनों में यात्रियों की संख्या तेजी से घटने लगी। हालात को देखते हुए मेट्रो प्रबंधन ने पांच जनवरी को ट्रेनों के फेरों की संख्या घटाकर 13 कर दी। वर्तमान में रोजाना केवल 300 से 350 यात्री ही मेट्रो का उपयोग कर पा रहे हैं। अब तक कुल 23 हजार यात्री मेट्रो से सफर कर चुके हैं।
एक महीने में ढाई करोड़ का खर्च
इस एक महीने के दौरान मेट्रो के संचालन पर लगभग ढाई करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि कुल आय केवल 4.50 लाख से पांच लाख रुपये के बीच रही है। यानी औसतन प्रतिदिन की आय करीब 15 हजार रुपये ही रही।
प्रायोरिटी कॉरिडोर पर भारी निवेश
भोपाल मेट्रो के पहले चरण के 30.8 किलोमीटर नेटवर्क पर कुल 10 हजार 33 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें से केवल सात किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर ही 2 हजार 225 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जहां फिलहाल मेट्रो का व्यावसायिक संचालन हो रहा है।
वैकल्पिक आय स्रोतों से नहीं मिल रही कमाई
दिल्ली मेट्रो सहित अन्य परियोजनाएं स्टेशन पर दुकानों, पार्किंग और विज्ञापनों से बड़ी आय अर्जित करती हैं। दिल्ली मेट्रो की कुल आय का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा विज्ञापनों से आता है, जो सालाना 300 से 400 करोड़ रुपये है। भोपाल मेट्रो अभी तक इन आय स्रोतों को आकर्षित नहीं कर पाई है। हालांकि अब विज्ञापनों के लिए निविदा जारी की गई है।





