सरकार ने तुर्किये की कंपनी की सुरक्षा मंजूरी कैंसिल की

ऑपरेशन सिंदूर के बाद ‘बायकॉट तुर्किये’ की मांग के बीच भारत सरकार ने सेलेबी (Celebi) एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सुरक्षा मंजूरी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है।

ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) के आदेश के मुताबिक यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। तुर्किये की यह कंपनी अब भारतीय एयरपोर्ट पर ग्राउंड हैंडलिंग के काम नहीं कर पाएगी।

सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया, तुर्किये की सेलेबी ग्रुप का हिस्सा है। यह मुंबई, दिल्ली, कोच्चि, कन्नूर, बेंगलुरु, हैदराबाद, गोवा, अहमदाबाद व चेन्नई जैसे 9 प्रमुख भारतीय हवाई अड्डों पर सेवाएं देती थी।

इधर, अडाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड ने चीनी कंपनी ड्रैगनपास के साथ करार समाप्त कर दिया है। इस प्लेटफॉर्म पर एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस सेवाएं दी जाती थीं।

कंपनी के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि ड्रैगनपास के ग्राहकों को अब अडाणी की ओर से प्रबंधित एयरपोर्ट पर लाउंज तक पहुंच नहीं मिलेगी।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की मदद करने को लेकर भारत में इस समय अजरबैजान, चीन और तुर्किये की कंपनी ओर सामानों का विरोध हो रहा है।

Celebi ने कहा- हम भारत में 10 हजार लोगों को रोजगार देते हैं

Celebi भारत में 15 साल से भी ज्यादा समय से एक्टिव है। कंपनी का कहना है कि वे प्राइवेट ग्राउंड हैंडलिंग क्षेत्र में टॉप लीडर हैं। हम 10,000 से अधिक भारतीयों को सीधे तौर पर रोजगार देते हैं। हमने 220 मिलियन अमेरीकी डॉलर से ज्यादा निवेश किया है।

सेलेबी की स्थापना 1958 में हुई थी। ये कंपनी विमानन सेवाओं में टॉप लीडर है। जो ग्राउंड हैंडलिंग, कार्गो और वेयरहाउस मैनेज करती है। सेलेबी एविएशन की सर्विस में पैसेंजर हैंडलिंग, रैंप सर्विस, लोड कंट्रोल, फ्लाइट ऑपरेशन और विमान की सफाई शामिल हैं।

सेलेबी तुर्की, भारत, हंगरी, जर्मनी, तंजानिया और इंडोनेशिया सहित कई देशों में काम कर रही है। 400 से अधिक एयरलाइन कस्टमर को सेवाएं प्रदान करती है।

ड्रैगनपास संभालता था डेटा-पासपोर्ट का काम

अडानी डिजिटल लैब्स अडानी ग्रुप की इनोवेशन ब्रांच है, जो अरबों यूजर्स के आवश्यक सेवाओं को साथ संपर्क के तरीके को बदलने के लिए काम करती है। ड्रैगनपास यात्रियों का संवेदनशील डेटा जैसे पासपोर्ट डिटेल्स और ट्रैवल हिस्ट्री संभालता है। ऐसे में चीन की कंपनियों पर डेटा शेयरिंग को लेकर पहले से ही संदेह बना हुआ है।

तुर्किये से सेब मंगाने से इनकार

एशिया की सबसे बड़ी फल और सब्जी बाजार दिल्ली की आजादपुर मंडी ने तुर्कियेके साथ सेबों के व्यापार को पूरी तरह से समाप्त करने का फैसला लिया है। मंडी अध्यक्ष मीठा राम कृपलानी ने कहा- तुर्किये से अब सेबों का कोई नया ऑर्डर नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा- हमने तुर्किये से होने वाले सेबों के व्यापार को अब पूरी तरह से बंद करने का निर्णय लिया है। हमने तुर्किये का बहुत साथ दिया है। साल 2024 में 1,16,000 टन सेबों को भारत मंगवाया गया, लेकिन फिर भी भारत के साथ तुर्किये ने ऐसा किया। अब केवल वही सेब आयेंगे जिनका ऑर्डर पहले से हुआ था।

शिमला के सेब किसान अक्षय ठाकुर ने कहा कि चीन और तुर्किये पाकिस्तान का समर्थन करते हैं। ये सही समय है कि तुर्किये और 44 देशों से सेब के आयात पर बैन लगाया जाए। इसमें ऐसा भी कर सकते हैं कि वहां से आयात होने वाले सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई जाए।

शूटिंग-शादी के लिए तुर्किये-अजरबैजान की परमिशन से इनकार संभव

भारतीय लोगों के तुर्किये और अजरबैजान में शादी और फिल्मों की शूटिंग के लिए जाने में कमी आ सकती है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सरकार भी लोगों से कह सकती है कि इन देशों में न जाएं।

देश के 5 राज्यों में तुर्किये कंपनियों के प्रोजेक्ट जारी

देश के 5 राज्यों यूपी, दिल्ली, मुंबई, गुजरात और जम्मू-कश्मीर में तुर्किये की कंपनियां आईटी, मेट्रो रेल और टनल सहित कई तरह के प्रोजेक्‍ट में काम कर रही हैं। इनके अलावा दूसरी कंपनियों ने भारत में कंस्ट्रक्शन और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टरों में निवेश कर रखा है। लखनऊ, पुणे और मुंबई में मेट्रो प्रोजेक्ट्स और गुजरात में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट इसमें शामिल हैं।

अब केंद्र सरकार ने तुर्किये की बाकी कंपनियों के सभी सरकारी और निजी प्रोजेक्ट्स की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। इन कंपनियों की भूमिका और हिस्सेदारी की समीक्षा के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि अगर राष्ट्रीय हित प्रभावित होता है, तो इन कंपनियों को प्रोजेक्ट्स से हटाया भी जा सकता है।

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