ग्रेटर नोएडा: जहां खेलते-खेलते डूब गया मासूम, किसका है वो ‘मौत का तालाब’? जिम्मेदार कौन?

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के दनकौर क्षेत्र में स्थित दलेलगढ़ गांव में शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने सबको झकझोर दिया। तीन साल का मासूम देवांश खेलते-खेलते करीब 10 फुट गहरे तालाब में गिर गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद सोमवार को एसडीएम आशुतोष गुप्ता समेत प्रशासन के कई अधिकारी पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और आर्थिक मदद देने का भरोसा दिया।

हादसे पर ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही और सुरक्षा उपायों की कमी ने एक और जान ले ली। बच्चा अपनी मां अंजलि के साथ बुलंदशहर से अपने नाना के घर आया था। गांव के मंदिर में 41 दिनों की पूजा के समापन पर भंडारे का आयोजन चल रहा था। इसी दौरान देवांश तालाब की ओर चला गया और अचानक पानी में गिर पड़ा। करीब आधे घंटे तक जब वह नजर नहीं आया तो परिजनों ने तलाश शुरू की। खोजबीन में तालाब में उसकी कैप तैरती मिली, जिसके बाद ग्रामीणों की मदद से बच्चे को बाहर निकाला गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

अवैध खनन और सुरक्षा की कमी पर सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तालाब में पिछले कई वर्षों से अवैध खनन हो रहा था जिससे इसकी गहराई 10 फुट से अधिक हो गई। तालाब में जलकुंभी फैली हुई थी और किनारों पर कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। लोगों का कहना है कि पुलिस और खनन विभाग को कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हर साल खनन के कारण तालाब और गहरा होता गया जो बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा था। सेक्टर-150 हादसे के बाद गांववालों ने तालाब की सफाई और तारबंदी के लिए प्राधिकरण से छह से अधिक बार गुहार लगाई थी। उनका मानना है कि अगर समय रहते सुरक्षा घेरा बना दिया जाता तो यह हादसा टल सकता था।

जमीन पर उभरा विवाद

हादसे के बाद सोमवार को एसडीएम आशुतोष गुप्ता समेत प्रशासन के कई अधिकारी पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और आर्थिक मदद देने का भरोसा दिया। परिवार ने लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और कहा कि अगर जल्द एक्शन नहीं लिया गया, तो वे धरने पर बैठेंगे। लेकिन अब घटनास्थल को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। हादसे को लेकर ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने दावा किया कि यह जमीन गांव के एक किसान के नाम दर्ज है और सरकारी तालाब नहीं है। वहीं, किसानों का कहना है कि उनकी जमीन घटनास्थल से काफी दूर है। ग्रामीण इसे ग्राम समाज की जमीन बता रहे हैं।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि तालाब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का था जिसकी सफाई और तारबंदी की मांग पहले की गई थी। जब शिकायतें पहले दी गई तो जमीन के स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई? तालाब गांव के बीचों-बीच है आसपास घनी आबादी है और छोटे बच्चे अक्सर यहां खेलते रहते हैं।

तालाब की फेंसिंग होगी

दलेलगढ़ गांव में देवांश की मौत के मामले में डीएम ने तालाब की फेंसिंग के निर्देश दिए हैं। कोतवाली प्रभारी मुनेंद्र सिंह ने कहा कि अभी तक कोई शिकायती पत्र कोतवाली में नहीं दिया गया है, लेकिन शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है? अगर प्राधिकरण ने पहले शिकायतों पर ध्यान दिया होता, तो शायद यह हादसा न होता।

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