लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान:प्रादेशिक सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने ताम्रपत्र देकर किया सम्मानित

लोकतंत्र भारतीय सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न अंग है। यह केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली की आत्मा और पहचान है। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को लोकतंत्र सेनानियों के प्रादेशिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। सीएम ने इस अवसर पर घोषणा की कि 70 साल से अधिक आयु के सभी लोकतंत्र सेनानियों को आयुष्मान कार्ड के जरिए सरकार नि:शुल्क इलाज मुहैया कराएगी।
पीएम एयर एम्बुलेंस सुविधा में भी उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। उद्योग एवं रोजगार के क्षेत्र में पात्रता के आधार पर लोकतंत्र सेनानियों के परिजनों को सभी सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता से लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजन के कल्याण के लिए कोई कसर नहीं रखेगी।
प्रधानमंत्री मोदी की पुस्तक का विमोचन किया इस दौरान सीएम यादव और कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मीसा पत्रिका और पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा आपातकाल के दौरान लिखे पत्रों, विचारों, आलेखों से जुड़े संस्मरणों पर आधारित पुस्तक इमरजेंसी डायरी का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में हरियाणा के पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और म.प्र. हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष अशोक कड़ेल को लोकतंत्र सेनानी होने के सम्मान स्वरूप ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया गया।
जबलपुर में प्राकृतिक खेती के नाम एक चौपाल में सीएम का ऐलान
प्राकृतिक खाद से पैदा अनाज अलग बिकेगा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को जबलपुर के मानस भवन में प्राकृतिक खेती के नाम एक चौपाल को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्परिणाम सामने आ चुके हैं, अब प्राकृतिक खेती ही समाधान है। राज्य में इसके लिए योजनाएं बनेंगी।
मंडियों में प्राकृतिक तरीके से उगाए गए अनाज और रासायनिक खाद से उगाए गए अनाज को खरीदने की अलग-अलग व्यवस्था बनाएंगे, ताकि जैविक खेती वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जा सके। डॉ. यादव ने कहा कि मप्र में प्राकृतिक खेती की बड़ी संभावनाएं हैं। गाय आधारित खेती को बढ़ावा मिलेगा। दूध उत्पादन 9% से बढ़ाकर 25% तक ले जाएंगे।
उन्होंने देशी गाय के दूध को उपयोगी बताया और भैंस के दूध को ज्यादा लाभदायक बताने को साजिश बताया। कार्यक्रम में मौजूद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती मानव जीवन के लिए वरदान है।
उन्होंने रासायनिक खाद के नुकसान और प्राकृतिक खेती के फायदे विस्तार से बताए। उन्होंने कहा कि यूरिया डीएपी ने पूरे देश की खेत वाली भूमि को बंजर कर दिया। आचार्य देवव्रत ने कहा कि मप्र देश का पेट है, जब पेट ही सही नहीं होगा तो बाकी हिस्सों में कैसे शुद्ध अनाज जाएगा।
इसलिए सबसे पहले पेट यानी मप्र से ही प्राकृतिक खेती की शुरुआत करनी होगी। कार्यक्रम में मंत्री राकेश सिंह, कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना और कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।





