ईरान-इजरायल युद्ध से रूस की चांदी, धड़ाधड़ यू-टर्न ले रहे रूसी तेल टैंकर, दो भारत की ओर मुड़े

नई दिल्ली: वक्त-वक्त की बात है। अभी कुछ दिनों पहले रूसी तेल को कोई खरीदने वाला नहीं था। रूसी तेल के टैंकर समंदर में डेरा डाले हुए थे। रूस काफी सस्ती दर पर तेल बेचने के लिए तैयार था। इसकी कीमत प्रति बैरल 50 डॉलर से नीचे आ गई थी। लेकिन समय ने ऐसा फेर लिया कि अब रूसी तेल की मांग बढ़ रही है। ऐसे में रूसी तेल प्रति बैरल 70 डॉलर को पार कर गया है। यानी रूस की चांदी होने लगी है। हालांकि रूस अभी भी भारत को डिस्काउंट रेट पर क्रूड ऑयल सप्लाई कर रहा है।
ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद मिडिल ईस्ट में फैला तनाव रूस के लिए वरदान साबित हुआ है। इस युद्ध के कारण ईस्ट एशिया में खाड़ी देशों के तेल की सप्लाई बाधित हुई है। ऐसे में भारत समेत कई एशियाई देश रूस के तेल पर निर्भर हो गए हैं। रूसी तेल के टैंकर लगातार यू-टर्न लेकर एशियाई देशों की ओर मुड़ने लगे हैं। ऐसे ही रूसी के दो टैंकर, जो पूर्वी एशिया जा रहे थे, वे भारत की ओर मुड़ गए हैं
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की आशंका
ईरान युद्ध के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य ( Strait of Hormuz ) में तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका है। ऐसे में रूस के दो तेल टैंकरों ने अपनी दिशा बदलकर भारत की ओर रुख कर लिया है। ब्लूमबर्ग के अनुसार ये टैंकर मूल रूप से पूर्वी एशिया जा रहे थे, लेकिन अब भारत में तेल उतारेंगे।
किस टैंकर में कितना तेल?
- Odune नाम का सुएजमैक्स टैंकर करीब 7.3 लाख बैरल तेल लेकर बुधवार को ओडिशा के पारादीप पोर्ट पहुंच गया।
- Matari नाम का अफ्रामैक्स टैंकर 7 लाख बैरल से ज्यादा तेल के साथ गुजरात के वाडीनार बंदरगाह पर पहुंचेगा।
- Indri नाम का सुएजमैक्स टैंकर, जो पहले सिंगापुर जा रहा था, इस हफ्ते अरब सागर में दिशा बदलकर भारत की ओर मुड़ गया है। इसमें करीब 7.3 लाख बैरल यूराल्स क्रूड ऑयल है।
जेट फ्यूल टैंकर भी एशिया की ओर मुड़े
ईरान युद्ध के कारण कई जेट फ्यूल टैंकरों ने यूरोप की बजाय एशियाई बाजारों की ओर रुख कर लिया है। शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार Navig8 Honor नाम का टैंकर, जो पश्चिमी बाजारों की ओर जा रहा था, उसने दिशा बदलकर अब साउथ-ईस्ट एशिया की ओर रुख कर लिया है। इस टैंकर में करीब 75,000 टन (करीब 5.91 लाख बैरल) जेट फ्यूल है। ऊर्जा विश्लेषण कंपनी Vortexa के एशिया-प्रशांत विश्लेषण प्रमुख इवान मैथ्यूज के अनुसार मौजूदा समय में बाजार की स्थिति ऐसी है कि भारत से जेट फ्यूल को यूरोप की बजाय एशियाई देशों को भेजना ज्यादा लाभदायक हो गया है।





