यही कोई मुस्लिम बोलता तो योगीजी अब तक.. राकेश टिकैत ने रामभद्राचार्य के ‘मिनी पाकिस्तान’ पर कही ऐक्शन वाली बात

मुजफ्फरनगर: जगद्गुरु रामभद्राचार्य के मिनी पाकिस्तान वाले बयान पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने पलटवार करते हुए इस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई मुस्लिम धर्मगुरु ऐसा बोलता, तो उस पर तत्काल कार्रवाई होती। टिकैत ने आरोप लगाते हुए कहा धर्मगुरु सरकार के एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि उन्हें ऐसी बहस का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।

सरकार चाहती है विवाद, धर्मगुरु बन रहे माध्यम
टिकैत ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार चाहती है कि देश में धार्मिक और सामाजिक विवाद बने रहें, ताकि असल मुद्दों से देश की जनता का ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने कहा, सरकार को ऐसे बयान चाहिए ताकि समाज में बहस और बंटवारा हो, और दुर्भाग्यवश कुछ धर्मगुरु भी उनके उसी एजेंडे को फॉलो कर रहे हैं। अगर कोई मुस्लिम धर्मगुरु ऐसा बयान देता, तो योगी सरकार की तरफ से तुरंत कार्रवाई होती, लेकिन इस बयान पर अब सभी की चुप्पी है।

भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर चिंता जताई
टिकैत श्रीलंका दौरे से लौटे हैं, जहां वे लली नामक एक अंतरराष्ट्रीय किसान संगठन की कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में 67 भाषाओं में चर्चा हुई, और दुनियाभर से आए करीब 2000 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि इस मंच पर भारत की सामाजिक स्थिति, खासकर जाति, धर्म, भाषा और लैंगिक आधार पर हो रहे बंटवारे को लेकर गंभीर चिंता जताई गई।

काले कानून शब्द पर भी हुआ था विरोध
सम्मेलन में टिकैत ने बताया कि भारत में जिन कृषि कानूनों को काला कानून कहा गया था, उसे भी रंगभेद से जोड़कर देखा गया। आयोजकों ने इस शब्द पर आपत्ति जताई और कहा कि यह शब्द नस्लीय भेदभाव को दर्शाता है, जिसे बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत में आंदोलनकारियों को आतंकवादी कहा जाता है, जबकि विश्व में उन्हें विरोध करने वाले नागरिक माना जाता है।

भूख को हथियार न बनाया जाए– वैश्विक चिंता
टिकैत ने यह भी बताया कि सम्मेलन में फिलिस्तीन, नेपाल और अन्य संघर्षरत देशों की स्थिति पर चर्चा हुई, जिसमें यह कहा गया कि खाद्य आपूर्ति को हथियार न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि कुछ सरकारें अपने विरोधियों को दबाने के लिए भोजन और ज़रूरी संसाधनों की आपूर्ति रोक रही हैं, जो अमानवीय है।

धर्मगुरुओं को रहना चाहिए तटस्थ
अंत में टिकैत ने दोहराया कि धर्मगुरुओं को राजनीतिक बहसों और सरकार के एजेंडों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा, जिस तरह पाकिस्तान में धर्मगुरु और मिलिट्री मिलकर कट्टरता को बढ़ावा देते हैं, वैसा ही माहौल भारत में भी बनने लगा है, जो खतरनाक संकेत है।

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