भोपाल में अब कोचों की मरम्मत में नहीं लगेंगे हफ्ते, इस मशीन से महज 2 दिन में ‘फिट’ होंगी ट्रेनें

 भोपाल: भोपाल में रेल यात्रियों के सफर को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने की दिशा में रेलवे ने एक बड़ी तकनीकी छलांग लगाई है।राजधानी में अत्याधुनिक सीएनसी अंडरफ्लोर व्हील लेथ मशीन की स्थापना के साथ ही अब ट्रेन कोचों के रखरखाव की पूरी तस्वीर बदलने वाली है।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि पहियों की मरम्मत का जो कार्य पहले 10 से 15 दिनों की लंबी प्रक्रिया में पूरा होता था, वह अब महज 48 घंटों में संपन्न हो सकेगा। इससे न केवल ट्रेनों की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि रद्दीकरण और लेटलतीफी जैसी समस्याओं से भी यात्रियों को निजात मिल जाएगी।

दो दिन में होगा काम

यह मशीन लगभग 10.72 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित की जा रही है और अगले महीने शुरू होने की संभावना है। वर्तमान में व्हील टायर टर्निंग का कार्य भोपाल वर्कशाप द्वारा किया जाता है। जब रानी कमलापति कोचिंग डिपो से कोई कोच ‘सिक’ घोषित होता है, तो उसे मरम्मत के लिए भेजा जाता है, जिसमें काफी समय लग जाता है। लेकिन इस नई सुविधा के शुरू होने से यह कार्य लगभग दो दिनों में ही पूरा किया जा सकेगा।

इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ट्रेनों का संचालन भी अधिक सुचारू रहेगा। साथ ही सीएनसी अंडरफ्लोर व्हील लेथ मशीन से कोचों के पहियों की सटीक टर्निंग होती है, जिससे उनकी उम्र बढ़ती है और नए पहियों की जरूरत कम होती है। इससे रेलवे को आर्थिक लाभ मिलेगा, यात्रियों को झटकों व शोर से राहत मिलेगी और आपात स्थिति में कोच जल्दी सेवा में लौट सकेंगे।

पूरी तरह आटोमेटेड है यह मशीन

इसकी खासियत यह है कि यह अंडरफ्लोर तकनीक पर आधारित है, यानी कोच को उठाए बिना ही पहियों की टर्निंग की जा सकती है। यह मशीन फर्श के नीचे स्थापित होती है, जिससे कार्यशाला की जगह की भी बचत होती है। इसके चलने वाले भाग नीचे होने के कारण ऑपरेटर के लिए यह ज्यादा सुरक्षित भी मानी जाती है। सीएनसी तकनीक के कारण यह मशीन पूरी तरह आटोमेटेड, तेज और अत्यंत सटीक होती है। इससे काम जल्दी पूरा होता है और उत्पादकता में भी वृद्धि होती है।

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