भोपाल में आबकारी विभाग ने सालों पुराने सरकारी रिकॉर्ड को जलाया, विवाद बढ़ने पर आबकारी आयुक्त बोले- यह एक नियमित प्रक्रिया

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बड़े दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि कांग्रेस की पार्षद ने नगर निगम में वंदे मातरम गाने से इनकार किया और बड़ी बेशर्मी के साथ कहा कि मैं नहीं गाऊंगी। यह कांग्रेस का चरित्र बता रहा है। कांग्रेस पार्षद भारत माता की जय बोलने से भी मना करते हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस पर स्पष्टीकरण दें। वे बताएं कि पार्टी इस तरह के लोगों को प्रोत्साहित क्यों करती है।

चुप क्यों है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ये लोग देश को कहां ले जाएंगे, देशभक्तों का अपमान करेंगे। हजारों देशभक्तों ने भारत माता की जय बोलते-बोलते प्राण त्याग दिए। मुझे इस बात का बड़ा दुख और मुझे इस मामले पर ग्लानि हो रही है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी जो हर मामले पर बोलते हैं, वो अब इस पर क्यों नहीं बोल रहे। कांग्रेस की पार्षद की टिप्पणी पर उनका क्या कहना है। अगर इस पर पटवारी और कांग्रेस नेता कोई कार्रवाई नहीं कर पाते, तो सभी को इस्तीफा दे देना चाहिए।

कांग्रेस का दोहरा चरित्र

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि जब देखो तब कांग्रेसी भगवान राम की निंदा करते हैं, हिंदुओं का अपमान करते हैं। अब तो इन्होंने सीमा ही पार कर दी है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वंदे मातरम के 6 छंदों को लेकर पूरे देश का दिल जीत चुके हैं। लेकिन, कांग्रेस अपने दोहरे चरित्र से बाहर नहीं आ पा रही। कांग्रेस ने आजादी के पहले से वंदे मातरम पर बखेड़ा खड़ा किया। उनकी सरकार ने 5 छंदों को ही गायब कर दिया था।

आबकारी आयुक्त ने किया स्पष्ट

विवाद बढ़ता देख आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने स्पष्ट किया कि यह कोई संदिग्ध घटना नहीं, बल्कि एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है। उनके अनुसार, सरकारी नियमों के तहत हर दस्तावेज की एक आयु होती है। जब वह अनुपयोगी हो जाता है, तो उसे नष्ट करना अनिवार्य होता है। आयुक्त ने दावा किया कि इन दस्तावेजों को नष्ट करने से पहले उनकी विधिवत सूची तैयार की गई है और एक विस्तृत रिपोर्ट भी बनाई गई है।

विभाग बेशक इसे रुटीन बता रहा है, लेकिन प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि वर्तमान डिजिटल युग में रिकॉर्ड को नष्ट करने के लिए आधुनिक तरीकों (जैसे पेपर श्रेडिंग) का उपयोग किया जाना चाहिए। खुले में फाइलें जलाना न केवल पर्यावरण के प्रतिकूल है, बल्कि इससे यह संदेह भी पैदा होता है कि क्या सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था।

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