छापेमारी में लैपटॉप, मोबाइल की जांच कर सकेंगे आयकर अधिकारी

यह कहना है इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के प्रेसिडेंट चरणजोत सिंह नंदा का। भोपाल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘नव दृष्टि’ के दौरानबातचीत की। जिसमें टैक्स सुधारों से लेकर भारत की ग्लोबल पोजिशन तक कई अहम मुद्दों पर बात की।

ICAI चीफ ने कहा न्यू इनकम टैक्स एक्ट 2025 में कई बडे़ प्रावधान किए गए हैं। यह एक्ट अप्रैल 2026 से लागू होगा। इस एक्ट में ऐसे प्रावधान किए गए हैं। जिससे कहीं भी कर चोरी की शिकायतों पर जांच करने पहुंची इनकम टैक्स की टीम को लैपटॉप, मोबाइल, पेनड्राइव, हार्ड डिस्क यहां तक कि स्मार्टवॉच जैसी डिजिटल डिवाइस की जांच कर सकेंगे।

हर व्यक्ति एक फाइनेंशियल कंसल्टेंट जरूर रखें नंदा ने आम नागरिकों को सलाह देते हुए कहा कि पहले अपनी आय के स्रोत लिखें और उसके बाद उसमें खर्च चलाने के लिए जरूरी योग्य हिस्से का हिसाब तय करें। इसमें ऐसी कोआर्डिनेशन बनाए कि एक राशि आपके पास ऐसी हो जिसे लो-रिस्क इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर सकें। हाई रिटर्न के लालच में न आएं, बल्कि कंपाउंडिंग को समय दें। यह एक ऐसा फॉर्मूला है, जिसने एक आम व्यक्ति को भी फाइंनेंशियली स्ट्रॉन्ग व्यक्ति बनाया है। गोल्ड, रियल एस्टेट और पॉलिसीज के बारे में पढ़ें-समझें। इससे सही निवेश की दिशा मिलेगी। एक फाइनेंशियल कंसल्टेंट रखें स्थायी न सही, लेकिन मार्गदर्शन जरूरी है। सबसे अहम है, टैक्स प्लानिंग करें और धैर्य रखें। अपने निवेश पर भरोसा रखना सबसे जरूरी है।

नया टैक्स एक्ट सरल भाषा में, कम होगा विवाद नंदा के अनुसार, पुराने टैक्स कानून में तीन बड़ी समस्याएं थीं। सेक्शनों की भरमार, भारी-भरकम भाषा और इंटरप्रेटेशन में अस्पष्टता। उन्होंने बताया कि ICAI ने सरकार से यह तीनों मुद्दे उठाए और अब नया एक्ट इन्हीं सुझावों के आधार पर बन रहा है। इसका फायदा यह होगा कि करदाता, अधिकारी और अदालत तीनों के लिए एक ही क्लियर मैसेज रहेगा और विवाद काफी हद तक खत्म होंगे।

डिजिटल जांच से बढ़ेगी पारदर्शिता नए टैक्स एक्ट में रेड या जांच के दौरान अब मोबाइल, लैपटॉप, टैब, हार्ड डिस्क की फोरेंसिक जांच का प्रावधान होगा। नंदा ने कहा कि चर्चा है कि यह अधिकार सिर्फ उच्च स्तर के अफसर के पास रहेगा। इस नए नियम का उद्देश्य मनमानी नहीं, बल्कि डेटा-ड्रिवन जांच है। कारोबार का बड़ा हिस्सा अब डिजिटल डिवाइस पर है, इसलिए इन्हें शामिल करना जरूरी था। टैक्स चोरी पकड़ना आसान होगा और ईमानदार करदाता निश्चिंत रह सकते हैं।

टैक्स चोरी खत्म हो जाएगी नंदा ने 26AS को आम भाषा में समझाया कि यह आपकी टैक्स पासबुक है। इसमें PAN पर कटे TDS, सेल्फ-असेसमेंट टैक्स, रिफंड और हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन का पूरा सालाना सारांश होता है। इससे गलतफहमियां घटती हैं और रिटर्न भरना आसान होता है। टेक्नोलॉजी और एआई का उपयोग बढ़ाया गया है। जिससे एक छोटा सा गैप भी अब पकड़ में आ जाता है। इसके चलते टैक्स चोरी की गुंजाइश बेहद कम हो गई है। आने वाले महीनों में तो यह लगभग खत्म हो जाएगी।

गुड्स नहीं, सर्विस का ग्लोबल हब उन्होंने कहा, जिस तरह चाइना गुड्स का हब बना, भारत सर्विसेज का बन रहा है। अकाउंटिंग, ऑडिट, कम्प्लाइंस, एनालिटिक्स और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग तक के लिए दुनिया भारत को देख रही है। भारतीय सीए क्वालिटी, स्पीड और एथिक्स में सबसे आगे हैं। यही वजह है कि ग्लोबल क्लाइंट्स हमारी ओर आकर्षित हो रहे हैं। हम उन्हें कम दाम में क्वालिटी वर्क मुहैया करा रहे हैं। हमारी स्टॉक मार्केट दुनिया की सबसे सेफ है। इसकी नियमन और पारदर्शिता ताकत है।

इन्फॉर्मेशन सिस्टम ऑडिट स्टैंडर्ड नंदा ने कहा कि जैसे अकाउंट बुक्स का ऑडिट होता है, वैसे ही ERP (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग), क्लाउड और अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर जैसे टेक्नोलॉजी सिस्टम का भी ऑडिट होना जरूरी है। इसके लिए ICAI का इन्फॉर्मेशन सिस्टम ऑडिट स्टैंडर्ड लगभग तैयार है। इससे भोपाल हो या दिल्ली, हर जगह ऑडिट की प्रक्रिया स्टैंडर्डाइज होगी। यह न केवल जोखिम घटाएगा, बल्कि बिजनेस में भरोसा भी बढ़ाएगा। यह टेक्नोलॉजी से लैस रहेगा, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है। लेकिन, खास यह है कि इसमें एआई का उपयोग इस रूप में किया जा रहा है कि यह ह्यूमन इंटेलिजेंस के लिए एक असिस्टेंट होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button