‘भारत मित्र, होर्मुज में भारतीय जहाजों को देंगे सुरक्षित रास्ता’, ईरान ने दी बड़ी राहत लेकिन बदले में क्या चाहता है?

तेहरान/नई दिल्ली: भारत में तेल और गैस की भारी किल्लत के बीच ईरान ने बड़ी राहत दी है। ईरान ने कहा है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देगा। नई दिल्ली में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने शुक्रवार को कहा कि भारत और ईरान क्षेत्र में साझा हित रखते हैं। उन्होंने कहा, ‘भारत हमारा मित्र देश है। आप इसे दो-तीन घंटों के भीतर देखेंगे। हमारा मानना है कि ईरान और भारत के क्षेत्र में समान हित हैं।’ ईरानी राजदूत फतहली ने यह भी कहा कि युद्ध के बाद मौजूदा हालात में भी भारत सरकार ने कई क्षेत्रों में ईरान की मदद की है। उनके इस बयान के बाद खबर आई कि ईरान ने भारत के दो गैस टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी। विदेशी मामलों के एक्सपर्ट का मानना है कि यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक दोस्ताना संबंधों को दर्शाता है।
ईरान में भारत के पूर्व राजदूत दिनकर श्रीवास्तव ने रूसी मीडिया आरटी से बातचीत में कहा कि यह एक स्वागतयोग्य घटनाक्रम है जो दर्शाता है कि भारत और ईरान के बीच दोस्ताना संबंध हैं। दिनकर श्रीवास्तव ने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में भी ईरान भारत के लिए एक अपवाद बनाने के लिए तैयार है। वहीं कई एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि भारत ब्रिक्स का अध्यक्ष है जो अमेरिका के खिलाफ खुलकर आवाज उठाता रहा है। ईरान भारत को यह छूट देने के बाद अब उम्मीद कर रहा है कि दिल्ली भी ब्रिक्स के जरिए अमेरिका और इजरायल के हमले के खिलाफ आवाज उठाए।
ईरान की ब्रिक्स पर मांग ने भारत को फंसाया
भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच चौथी बार बातचीत हुई है। इस बातचीत में ईरान ने नई दिल्ली से उम्मीद जताई कि वह ब्रिक्स के अध्यक्ष के नाते अमेरिका और इजरायल के हमले के खिलाफ एक बयान जारी करे। ईरान ब्रिक्स का सदस्य देश है। ईरान की इस मांग से भारत अब बड़ी दुविधा में फंस गया है। ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका मूल सदस्य देश थे। अब इसमें मिस्र, इथोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया भी सदस्य बन गए हैं। सऊदी अरब और यूएई में अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं और इन दोनों ही देशों पर ईरान लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है।ईरान बनाम सऊदी अरब और यूएई की दुविधा में अब भारत फंस गया है। ब्रिक्स के अध्यक्ष होने के नाते इस साल इन देशों का शिखर सम्मेलन भी आयोजित किया जाना है। ईरानी विदेश मंत्री ने खासतौर पर ब्रिक्स का जिक्र किया है और सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए कहा है। वहीं भारत ने अब तक किसी का पक्ष नहीं लिया है। पीएम मोदी ने ईरान से लेकर यूएई के नेताओं से बातचीत की है। ईरान चाहता है कि भारत निंदा प्रस्ताव का नेतृत्व करे लेकिन यह आसान नहीं होगा। इससे अमेरिका और इजरायल भी भड़क सकते हैं।
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने पर रखी शर्त
उधर, दिल्ली में ईरानी राजदूत का यह बयान उस वक्त आया है जब एक दिन पहले ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने कहा था कि तेहरान ने कुछ देशों के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी है। तख्त-रवांची ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान द्वारा जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने के आरोप सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान यह मार्ग बंद था। उन्होंने कहा कि ईरान दुश्मन देशों को इस स्ट्रेट का इस्तेमाल नहीं करने देगा। उनके मुताबिक, जो देश ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई में शामिल रहे हैं, उन्हें इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही का लाभ नहीं दिया जाएगा। बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है।
इधर, भारत के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या 28 बनी हुई है और सभी जहाजों तथा उनके चालक दल की सुरक्षा पर नजर रखी जा रही है। इनमें से 24 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं, जबकि चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्व में हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक मौजूद हैं। मंत्रालय के अनुसार, संबंधित प्राधिकरण, जहाज प्रबंधक और भर्ती एजेंसियां भारतीय दूतावासों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं तथा जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।





