CITIIS 2.0 में ‘स्मार्ट’ शहर बनेंगे जबलपुर और उज्जैन,135 करोड़ रुपये की DPS तैयार; पर्यावरण संरक्षण पर जोर

भोपाल: भारत सरकार के सिटीज-2.0 प्रोजेक्ट (CITIIS 2.0) के तहत प्रदेश के दो शहर स्मार्ट बनाए जाएंगे। प्रोजेक्ट में जबलपुर और उज्जैन का चयन किया गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इन दोनों शहरों की डीपीआर बना ली है। इसे जल्द ही भारत सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
कुल 135 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में शहरों का सुव्यवस्थित विकास किया जाएगा। खासकर इन शहरों में तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सालिड वेस्ट मैनेजमेंट) जैसे क्षेत्रों में विकास किया जाएगा।बता दें कि भारत सरकार ने स्मार्ट सिटीज-2.0 योजना की शुरूआत की है। योजना के तहत 100 स्मार्ट शहरों में से 18 शहरों का चयन किया गया है। इन शहरों को लगभग 135 करोड़ की राशि दी जाएगी। जिसमें 50 प्रतिशत राज्य शासन का समावेश भी होगा। इनमें मप्र से जबलपुर और उज्जैन का चयन हुआ है।
सिटीज-2.0 के अंतर्गत ऐसे कार्यों को किया जा रहा है, जो पर्यावरण को संरक्षित रख सके और चयनित शहर में निवेश को प्रोत्साहित कर सकें। इन कार्यों में निजी भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिन कार्यों में राशि व्यय हुई है उसकी शासन द्वारा प्रतिपूर्ति भी की जाएगी।
धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से भी किया जा रहा विकास
उज्जैन के प्रोजेक्ट में घाटों और मंदिरों का जीर्णोद्धार, स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन, यूनिटी माल का निर्माण और एकीकृत जल व ऊर्जा प्रबंधन पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि इसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनी रहे और पर्यटन को बढ़ावा मिले। वहीं जबलपुर के प्रस्ताव में जबलपुर ने टेक्सटाइल एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर जैसे प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को भेजे हैं, जो औद्योगिक विकास पर केंद्रित हैं। इन्हें सिटीज 2.0 के तहत अतिरिक्त फंड मिलेगा, जिससे ये भविष्य के मेट्रोपालिटन शहरों के रूप में उभर सकें।
जबलपुर को पहली किस्त में मिले साढ़े सात करोड़
सिटीज-2.0 में शामिल जबलपुर को भी 150 करोड़ रुपये मिलेंगे। पहली किस्त में साढ़े सात करोड़ रुपये आ चुके हैं। इस योजना का उद्देश्य अर्थव्यस्था में सुधार, एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाना है। इसके तहत कचरे के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के माध्यम से शहरों को स्वच्छ और टिकाऊ बनाना भी है। जबलपुर में इस योजना से प्राप्त राशि का उपयोग गीले कचरे से सीएनजी गैस प्लांट बनाने सहित अन्य कार्य करने में होगा।
उज्जैन में कचरा संग्रहण वाहनों तक सीमित हो गया एजेंसी का काम
उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड (यूएससीएल) ने सिटीज-2.0 योजना के अंतर्गत शहर को जीरो वेस्ट बनाने के लिए 28 करोड़ रुपये की व्यापक योजना बनाई थी। इसका उद्देश्य केवल कचरा संग्रहण नहीं बल्कि परिपत्र अर्थव्यवस्था आधारित कचरा प्रबंधन, नागरिक जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन के जरिए स्थायी स्वच्छता माडल तैयार करना था।
योजना में श्रीमहाकाल महालोक से लेकर मोहल्लों तक नुक्कड़ नाटक, गीत-संगीत, प्रभात फेरी, रैलियां, मानव श्रृंखला, स्कूलों में प्रतियोगिताएं और सोशल मीडिया प्रचार शामिल थे। इसके लिए एजेंसी को 36 माह में 54 वार्डों में 108 वालंटियर, छह आइईसी विशेषज्ञ और 12 बैक-आफिस स्टाफ तैनात करना था। टेंडर प्रक्रिया के अंतिम चरण में शर्तों में ढील दी गई और अधिकांश जनजागरूकता गतिविधियां हटा दी गईं।
अब एजेंसी का कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से कचरा संग्रहण वाहनों तक सीमित हो गया है। चार एजेंसियों को काम बांटने से प्रतियोगिता समाप्त हो गई और राशि में कोई कटौती नहीं की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ओडीएफ प्लस-प्लस, स्वच्छ सर्वेक्षण और जीरो वेस्ट लक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत यह परियोजना नागरिक सहभागिता और स्थायी स्वच्छता माडल बनाने का अहम अवसर थी, जिसे घटाए गए काम के कारण चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।





