कनाडा संसदीय चुनाव में खालिस्तानियों को बहुत बड़ा झटका, हार गया भारत विरोधी तत्वों का ‘सरदार’ जगमीत सिंह

टोरंटो: कनाडा संसदीय चुनाव में खालिस्तानियों को बहुत बड़ा झटका लगा है। खालिस्तान समर्थक अलगाववादी नेता जगमीत सिंह चुनाव हार गये हैं। जगमीत सिंह ही वो नेता हैं, जिनकी वजह से पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत के साथ संबंध खराब कर लिए थे। जगमीत सिंह न्यू डेमोक्रेट्स पार्टी (NDP) के नेता हैं, जो कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री ट्रूडो के गठबंधन सहयोगी थे। चुनाव हारने के बाद उन्होंने कहा कि वह पार्टी की कमान आठ साल तक संभालने के बाद पद छोड़ रहे हैं। ट्रूडो द्वारा सितंबर 2023 में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता के आरोप के बाद से नई दिल्ली और ओटावा के बीच तनाव बढ़ गया था। निज्जर को कनाडा में एक सिख मंदिर के बाहर गोली मार दी गई थी।

वहीं कनाडा के न्यूज चैनलों के मुताबिक प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी ने सोमवार को कनाडा के संघीय चुनाव में जीत हासिल कर ली है। जो जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफा देने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री बने थे। जस्टिन ट्रूडो जब तक प्रधानमंत्री थे, उनकी लिबरल पार्टी चुनाव में बुरी तरह से हारती दिख रही थी, लेकिन मार्क कार्नी के आने के बाद पार्टी ने अपने प्रदर्शन में जबरदस्त सुधार करते हुए चुनाव जीत लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक एनडीपी नेता जगमीत सिंह चुनाव हार गए हैं और बर्नबाई सेंट्रल राइडिंग में तीसरे स्थान पर रहे।
कनाडा चुनाव में जगमीत सिंह की हार
आपको बता दें कि पिछले दिनों नवभारत टाइम्स से बात करते हुए भारतीय मूल के कनाडाई उद्योगपति आदित्य झा, जिन्हें कनाडा का सर्वोच्च सम्मान मिल चुका है, उन्होंने कहा था कि इस बार भारतीय समुदाय ने खालिस्तानी नेताओं के खिलाफ एकजुट होकर वोट करने का फैसला किया है। माना जा रहा है उसी की नतीजा जगमीत सिंह की हार है। लिबरल पार्टी को चुनावी पोल में करारी हार की तरफ बढ़ते देखा जा रहा था, लेकिन जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफा देने और ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद स्थिति बदल गई। ट्रंप बार बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की धमकी दे रहे थे और उन्होंने कनाडा के ऊपर भारी भरकम टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। जिसके खिलाफ कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भी डटकर खड़े हो गये। उन्होंने इसे कनाडा की संप्रभुता का मामला बताया और राष्ट्रवाद की भावना के आधार पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही लिबरल पार्टी को लगातार चौथी बार सरकार बनाने का मौका मिल रहा है।
कनाडा की राजनीति के एक्सपर्ट्स के मुताबिक जगमीत सिंह कनाडा से सक्रिय सिख चरमपंथियों के पसंदीदा राजनेता रहे हैं और पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के साथ उनके संबंध दशकों पुराने रहे हैं। जगमीत सिंह ने भारतीय राजनयिकों को निष्कासित करने के कनाडा सरकार के फैसले का समर्थन किया था। ANI के मुताबिक उन्होंने कहा था कि "हम भारत के राजनयिकों को निष्कासित करने के आज के फैसले का समर्थन करते हैं और हम कनाडा सरकार से एक बार फिर भारत के खिलाफ राजनयिक प्रतिबंध लगाने, कनाडा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नेटवर्क (RSS) पर प्रतिबंध लगाने और कनाडा की धरती पर संगठित आपराधिक गतिविधि में भाग लेने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे गंभीर परिणाम भुगतने के लिए प्रतिबद्ध होने का आह्वान करते हैं।"

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