अजीम प्रेमजी की विप्रो छोड़ी, शुरू किया ये काम, अब 23 करोड़ का टर्नओवर, ऐसे हुआ नाम

नई दिल्‍ली: दीपक राज तुषीर ने अपनी कामयाबी से बहुत लोगों को चौंकाया है। वह हरियाणा के सोनीपत जिले में जंती खुर्द गांव के रहने वाले हैं। अजीम प्रेमजी की विप्रो (Wipro) को छोड़कर उन्‍होंने सफल डेयरी फार्म (Dairy Farm) बनाया है। इस फार्म का टर्नओवर 23 करोड़ रुपये को पार कर चुका है। किसी ने उम्‍मीद नहीं की थी कि एक कंप्‍यूटर इंजीनियर डेयरी फार्मिंग में ऐसी सफलता हास‍िल करेगा। दीपक ने बीई (इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) और एमबीए (MBA) की पढ़ाई की है। साल 2012 में न्यूजीलैंड के दो किसानों और अपने दो साथी कंप्यूटर इंजीनियरों संग मिलकर उन्‍होंने ‘ब‍िंसर फार्म्स’ की शुरुआत की। उनका मकसद अपने गांव की तरक्‍की में योगदान देना और अच्छी क्‍वालिटी वाला दूध उपलब्ध कराना था। आइए, यहां दीपक राज तुषीर की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।

10 साल विप्रो में किया काम

दीपक राज तुषीर मूल रूप से हरियाणा के जंती खुर्द गांव के रहने वाले हैं। उनके पास बीई (इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) और एमबीए की डिग्री है। विप्रो में 10 साल के सफल करियर के बाद उन्होंने डेयरी फार्मिंग में अपना सफर शुरू करने का फैसला किया। दीपक ने न्यूजीलैंड की एडवांस खेती के तरीकों को अपनाया। आज उनके फार्म में 500 से ज्‍यादा गायें हैं।

एक बछिया से हुई थी शुरुआत

बिंसर फार्म्स की शुरुआत एक बछिया से हुई थी। दीपक और उनके साथियों ने फार्म के लिए होल्स्टीन फ्रीजियन (HF), जर्सी और देसी भारतीय नस्लों की गायों को चुना। ये ज्‍यादा दूध देती हैं। मशीनों से दूध निकालने के लिए उपयुक्त हैं। उन्होंने अच्छी क्‍वालिटी वाली गायों के लिए रिसर्च की और स्थापित ब्रीडिंग स्‍टैंडर्ड्स का पालन किया।

मुश्किलों का करना पड़ा सामना

शुरुआत में दीपक को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 50 गायों में से 15 बीमारी के कारण मर गईं। इससे केवल 35 गायें बचीं। इस शुरुआती झटके से दीपक निराश हुए। लेकिन, हार नहीं मानी। दीपक ने 15 गायों को गंवाने के बाद अपनी आईटी नॉलेज का इस्तेमाल करके स्थिति का विश्लेषण किया। उन्होंने गायों का वजन तौलना और लैब टेस्ट करवाना शुरू किया। इससे उन्हें पता चला कि स्वस्थ गायों का वजन अच्छा होता है, जबकि कम वजन वाली गायें बीमारियों से ग्रस्त होती हैं।

अब करोड़ों का टर्नओवर

इसके बाद दीपक ने गायों के परीक्षण और प्रबंधन के लिए सख्त नियम बनाए। उन्होंने अच्छी क्‍वालिटी वाले सीमेन का इस्तेमाल किया। इससे स्वस्थ और ज्‍यादा दूध देने वाले पशु मिले। बिंसर फार्म्स को स्थानीय डेयरी व्यवसायों पर बढ़त मिली। किसानों को दूध के उचित दाम न मिलने की समस्या को देखते हुए दीपक और उनके साथियों ने अपनी दूध को बोतलों में पैक करना शुरू किया। शुरुआत में रोजाना सिर्फ 4 से 10 लीटर दूध बिकता था। लेकिन, क्‍वालिटी की वजह से यह जल्द ही 7,000 से 8,000 लीटर तक पहुंच गया। 2023 में बिंसर फार्म्स ने 23 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल किया। इसमें 5-6% का नेट मार्जिन था।

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