अरेरा कॉलोनी में शराब दुकान, जांच करने पहुंचे अफसर:मानव अधिकार आयोग में रहवासियों ने की थी शिकायत

भोपाल की अरेरा कॉलोनी में शराब दुकान खुलने के मामले में बुधवार को आबकारी विभाग और जिला प्रशासन के अफसर जांच करने पहुंचे। रहवासियों ने मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में शिकायत की थी। इसके बाद आयोग ने 15 दिन में जिम्मेदारों को रिपोर्ट देने को कहा।

जानकारी के अनुसार, 28 जुलाई को आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो की पीठ ने इस मामले में मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के अंतर्गत संज्ञान लिया था। प्रदेश सरकार को निर्देशित किया गया था कि भोपाल के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर शिकायत की जांच कराकर 15 दिन में कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।

जब कोई कार्रवाई नहीं की गई तो 19 अगस्त को फिर से स्मरण पत्र भेजा गया। इस पर आयोग ने आबकारी आयुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किया। जिसमें 3 अक्टूबर को मानव अधिकार आयोग के दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय में प्रतिवेदन सहित उपस्थित होने का आदेश दिया था। इसके बाद बुधवार को आबकारी विभाग मौके पर पहुंचा और रहवासियों के बयान लेना शुरू किए। बयान के दौरान ही रहवासियों ने कहा कि दुकान हटाई जाए। वरना, रहवासी धरना प्रदर्शन करेंगे।

नोटिस के बावजूद कार्रवाई न होना चिंताजनक कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि आयोग की बार-बार की नोटिस और चेतावनियों के बावजूद जिम्मेदारों ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। यह लापरवाही नहीं, बल्कि साठगांठ है। कैसे एक ही दीवार के सहारे हॉस्पिटल और शराब दुकान का संचालन किया जा सकता है?

शिकायतकर्ता और रहवासी पूर्णेंदु शुक्ला ने कहा कि शराब दुकान धार्मिक स्थल और बच्चों के अस्पताल के पास खुलवाना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि रहवासियों के अधिकारों का हनन भी है। लवनीश भाटी ने कहा, यह सब मिलीभगत से हुआ है। रहवासी भूखंड पर व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।

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