लखनऊ: एसटीएफ और साइबर क्राइम थाने की संयुक्त टीम ने रविवार सुबह आईआईएम रोड स्थित सहारा होमर के पास से करोड़ों रुपये के लोन फ्रॉड गिरोह के मास्टरमाइंड आमिर अहसन को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से 100 से अधिक लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से लोन पास कराकर करोड़ों रुपये की ठगी की। इस मामले में पहले ही यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की जानकीपुरम शाखा के मैनेजर गौरव सिंह समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
कैसे हुआ लोन फ्रॉड?
हजरतगंज निवासी राज बहादुर गुरुंग ने शिकायत में बताया कि उनके परिचित इंद्रजीत के कहने पर उन्होंने वर्ष 2023 में अपना आधार और पैन कार्ड लोन पास कराने के नाम पर दिया था। उन्हें जानकीपुरम स्थित यूनियन बैंक शाखा ले जाया गया, जहां बैंक मैनेजर ने कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए। कुछ महीनों बाद उनके मोबाइल पर ईएमआई बकाया का मैसेज आया। जांच में पता चला कि उनके नाम पर 28 अप्रैल 2023 को 9.50 लाख रुपये का मुद्रा लोन और 10 मई 2023 को 1.50 लाख रुपये का कार लोन पास हो चुका था।
फोटो एडिट कर तैयार किए फर्जी दस्तावेज
एसटीएफ के अनुसार, गिरोह आधार और पैन कार्ड पर लगी फोटो को एडिट कर अपने सदस्यों की फोटो लगाता था। फर्जी कंपनियों के नाम पर कोटेशन तैयार कर बैंक कर्मियों की साठगांठ से मुद्रा लोन स्वीकृत कराया जाता था। बाद में रकम हड़प ली जाती थी। गिरोह अलग-अलग बैंकों से 100 से अधिक व्यक्तियों, फर्मों और कंपनियों के नाम पर लोन लेकर करोड़ों रुपये का फ्रॉड कर चुका है।
मास्टरमाइंड की भूमिका
एएसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक, आमिर अहसन ने बीए करने के साथ ड्राफ्ट्समैन में डिप्लोमा किया है। 2018 में उसकी मुलाकात नावेद से हुई थी, जिसके बाद दोनों ने फर्जी लोन गिरोह की योजना बनाई। आरोपित के पास से एक मोबाइल फोन, आधार कार्ड, तीन क्रेडिट/डेबिट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, चार लग्जरी गाड़ियां जिसमें दो इनोवा क्रिस्टा, एक एक्सयूवी-500 और एक सियाज तथा नकदी बरामद की गई है।
एसटीएफ अब आरोपितों के बैंक खातों, वॉलेट और अन्य वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। जब जांच की भनक लगी तो एक अन्य आरोपी ने अपना लैपटॉप और मोबाइल नदी में फेंककर साक्ष्य मिटाने की कोशिश की थी।
आगे की कार्रवाई
13 सितंबर 2025 को एसटीएफ ने गौरव सिंह समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार किया था। अब मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा। पुलिस का कहना है कि मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।