मधुबाला ने ठुकरा दिया था हॉलीवुड फिल्मों का ऑफर, ऑस्कर विनर डायरेक्टर को क्यों कहा था ‘ना’

मधुबाला नाम सुनते ही लोगों के दिलों में पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। 14 फरवरी 1933 को दिल्ली में जन्मी मधुबाला का असली नाम मुमताज जहां देहलवी था। बचपन से ही उनके चेहरे पर एक अलग चमक थी, जिसने फिल्म निर्माता और दर्शकों दोनों को अपना दीवाना बना दिया। बताया जाता है कि उन्हें ऑस्कर विनर डायरेक्टर ने ऑफर दिया था। जिस वक्त ज्यादातर लड़कियां खेलकूद और पढ़ाई तक सीमित रहती थीं, उस वक्त मधुबाला ने ड्राइविंग सीखकर बांधी गई सीमाओं को तोड़ दिया था। उनकी उम्र उस वक्त महज 12 साल थी।
मधुबाला का जन्म 14 फरवरी 1933 को दिल्ली में हुआ। उनका असली नाम मुमताज जहां देहलवी था। उनके पिता, अताउल्लाह खान, पेशावर की एक तंबाकू फैक्ट्री में काम करते थे, लेकिन बेहतर जीवन की तलाश में मुंबई आ गए। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ऐसे में मधुबाला को 9 साल की उम्र में ही काम करना पड़ा। उन्होंने फिल्म ‘बसंत’ में एक बाल कलाकार के रूप में काम करना शुरू किया और उस समय उन्हें बेबी मुमताज के नाम से जाना गया। उनकी मासूमियत और अदाकारी ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
छोटी उम्र में सीख ली थी ड्राइविंग
9 साल की उम्र में ‘बसंत’ से बाल कलाकार के रूप में शुरू हुए उनके सफर ने आगे चलकर उन्हें बॉलीवुड का सितारा बना दिया। वह न सिर्फ खूबसूरत थीं, बल्कि समय से काफी आगे की सोच रखने वाली लड़की थीं। इसी सोच का बड़ा उदाहरण है उनका ड्राइविंग सीखना। जब वह महज 12 साल की थी, तब समाज में लड़कियों के लिए ड्राइविंग करना एक साहसिक कदम माना जाता था। मधुबाला ने न केवल ड्राइविंग सीखी, बल्कि इसे कॉन्फिडेंस के रूप में भी लिया।
मधुबाला ने ठुकरा दिया था हॉलीवुड का ऑफर
उनकी चर्चा न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी देखने को मिली। उस दौर में यह कम ही होता था कि कोई भारतीय एक्ट्रेस को विदेशों से ऑफर मिलते हों। लेकिन ऑस्कर विनर डायरेक्टर फ्रैंक कैप्रा ने उन्हें अमेरिका में बड़े बजट की फिल्मों का ऑफर भेजा। यह ऑफर उन्हें हॉलीवुड में भी जबरदस्त पॉप्युलैरिटी दिला सकता था, लेकिन मधुबाला ने इसे ठुकरा दिया था।
कहा- असली सफलता सिर्फ ग्लैमर या पैसा नहीं
उन्होंने परिवार और देश को हमेशा पहले रखा। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि यह फैसला उनके करियर के लिए आसान नहीं था। उन्होंने कहा था, ‘असली सफलता सिर्फ ग्लैमर या पैसा नहीं, बल्कि अपने मूल्यों और फैसलों में भी होती है।’
मधुबाला ने की 70 फिल्में
अपने 22 साल के करियर में मधुबाला ने लगभग 70 फिल्मों में काम किया। मधुबाला का फिल्मी करियर तेजी से आगे बढ़ा। उन्होंने 1947 में ‘नील कमल’ जैसी फिल्मों में काम किया, जिसमें उनका नाम बदलकर ‘मधुबाला’ कर दिया गया। 1950 के दशक में मधुबाला ने कई सफल फिल्में दीं, जिनमें ‘महल’, ‘फागुन’, ‘हावड़ा ब्रिज’, ‘काला पानी’ और ‘चलती का नाम गाड़ी’ आदि शामिल हैं। उनके साथ उस समय के मशहूर एक्टर जैसे राजकपूर, दिलीप कुमार, अशोक कुमार और देवानंद भी काम कर चुके थे। कुछ फिल्मों जैसे ‘महल’, ‘मुगल-ए-आजम’, और ‘चलती का नाम गाड़ी’ में उन्हें सिनेमा की ‘सौंदर्य देवी’ का टैग दिलाया। उनका जीवन आसान नहीं था। बचपन में ही उन्होंने कई आर्थिक कठिनाइयां देखीं, और बाद में दिल की बीमारी ने उनकी जिंदगी की चुनौतियों को बढ़ा दिया।
सबसे बड़ी पहचान फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ से
मधुबाला की कामयाबी की सबसे बड़ी पहचान फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ बनी। यह हिंदी सिनेमा की ऐतिहासिक फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान वह गंभीर दिल की बीमारी से जूझ रही थीं, इसके बावजूद उन्होंने शूट पूरे किए। कई बार सेट पर उनकी तबीयत बिगड़ जाती थी, लेकिन उन्होंने कभी अपने काम को बीच में नहीं छोड़ा।
दिलीप कुमार से क्यों हुईं अलग
मधुबाला की पर्सनल लाइफ में काफी उठापटक रही सती। उनकी प्रेम कहानी दिलीप कुमार और बाद में किशोर कुमार के साथ चर्चित रही। दिलीप कुमार के साथ उनका रिश्ता गहरा था, लेकिन परिवार की वजह से अलगाव हो गया। बाद में उन्होंने किशोर कुमार से शादी की, जिन्होंने उनके अंतिम समय तक उनका ख्याल रखा और उनका सहारा बने रहे।
मधुबाला के दिल में था छेद, 36 साल की उम्र में निधन
मधुबाला की जिंदगी में कई मुश्किल दिन भी आए। 1960 के दशक में उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। जांच कराने पर पता चला कि उनके दिल में छेद है। इसके कारण उनके शरीर में खून की मात्रा बढ़ने लगी और कई बार उनकी सेहत गंभीर रूप से खराब हो गई। लंदन के डॉक्टरों ने सर्जरी से मना कर दिया। इस कठिन समय में भी मधुबाला ने अपनी आत्मनिर्भरता नहीं खोई। बीमारी ने धीरे-धीरे उनके करियर को सीमित कर दिया, लेकिन उन्होंने कभी अपनी कमजोरी को आड़े नहीं आने दिया उनके योगदान और अभिनय को आज भी याद किया जाता है। आज ही के दिन 23 फरवरी 1969 को महज 36 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।





