मदरसे में गीता, उर्दू और कुरान पर सियासी बहस:विधायक रामेश्वर शर्मा बोले- जब उर्दू पढ़ाई जा सकती है तो गीता पर आपत्ति क्यों

भोपाल, मध्यप्रदेश पुलिस के एडीजी (प्रशिक्षण) राजाबाबू सिंह द्वारा मदरसों में नैतिक शिक्षा के रूप में गीता पढ़ाने के विचार को राजनीतिक समर्थन मिलना शुरू हो गया है। भोपाल के हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस पहल का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि गीता विश्व में मानवता की रक्षा का सबसे बड़ा उदाहरण है।

विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिशा देने वाला दर्शन है। गीता से आत्मबल मिलता है, सामाजिक समरसता का ज्ञान प्राप्त होता है और अन्याय व अपराध के खिलाफ संघर्ष करने की प्रवृत्ति विकसित होती है।

उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि जब मदरसों में हिंदू बच्चों को बुलाकर उर्दू पढ़ाई जा सकती है, तो गीता पढ़ने में आपत्ति क्यों होनी चाहिए। उनके मुताबिक, गीता किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए मार्गदर्शक ग्रंथ है।

रामेश्वर शर्मा ने कहा कि गीता सबको पढ़नी चाहिए और गीता सबको पढ़ाई भी जानी चाहिए। यह ग्रंथ कर्तव्य, कर्म और नैतिकता का संदेश देता है, जो आज के समय में हर नागरिक के लिए जरूरी है।

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