राजिम कुंभ में लोककला-लोकआस्था का संगम, अयोध्या कांड पर भावपूर्ण व्याख्यान

गरियाबंद।  राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 के तीसरे दिन लोककला, लोकसंस्कृति और लोकआस्था की त्रिवेणी पूरे वैभव के साथ प्रवाहित होती नजर आई। प्रदेशभर से आए कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दर्शा रही है। पूर्व महोत्सव स्थल स्थित स्थानीय नदी मंच पर खुरसेंगा निवासी ताम्रध्वज साहू ने रामायण के अयोध्या कांड का व्याख्यान  करते हुए कहा कि राम से बड़ा राम का नाम है। कहा कि रामायण जीवन जीने की कला सिखाती है और जिस घर में रामायण का पाठ और श्रवण होता है, वहां सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। उन्होंने कथा को विस्तारपूर्वक भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की कड़ी में लफंदी के अन्नू साहू ने रामधुनी, बंगोली कुरूद के पन्नालाल कुर्रे ने सतनाम भजन तथा कपसीडीह के वीरेंद्र ठाकुर ने मानस गान की प्रस्तुति दी। धमतरी की द्रौपदी सिन्हा द्वारा प्रस्तुत रामधुनी ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

इधर नवीन मेला स्थल के स्थानीय मंच पर सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक झमाझम रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसे दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। परसठी के विष्णु प्रसाद साहू ने पंडवानी की दमदार प्रस्तुति दी, वहीं आरंग के गोपाल चक्रधारी ने जगराता प्रस्तुत कर समां बांधा।

नवापारा राजिम की देविका साहू ने लोकनृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी। मांढर, रायपुर के सकुन साहू की जस झांकी में माता की महिमा का जीवंत चित्रण देखने को मिला। अछोला के अजय साहू ने सुगम गायन प्रस्तुत किया, जबकि बासीन के कलाकारों ने सतनाम भजन के माध्यम से संत बाबा गुरु घासीदास का स्मरण किया। लोककला मंच पर अभनपुर के मोहित सिन्हा ने अपनी प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरीं। वहीं भलेरा, रायपुर के झुमुकराम ने लोककला मंच, कुंडेल की मिलवंतीन बाई ने सुवा नृत्य तथा गरियाबंद की तारासनी पटेल ने लोकनृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

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