‘धर्म और राजनीति का हमेशा फिल्मों से लेना-देना’, जेसन शाह की ‘जन नायकन’ रिलीज विवाद के बीच दो टूक

थलपति विजय की ‘जन नायकन’ अब तक रिलीज नहीं हुई है। सेंसर सर्टिफिकेशन के फेर में फंसी इस फिल्म का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। यह फिल्म पहले 9 जनवरी हो ही रिलीज होनी थी। CBFC ने कट्स लगाने के बावजूद इसे रिलीज के लिए सर्टिफिकेट नहीं दिया। मामला मद्रास हाई कोर्ट पहुंचा, जहां डिविजन बेंच ने इस पर अंतरिम रोक लगा दी। अब मेकर्स ने सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इस बीच फिल्म में अहम भूमिका निभा रहे एक्टर जेसन शाह ने इस पर चुप्पी तोड़ी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने ‘धर्म और राजनीति’ का जिक्र किया है। साथ ही कहा कि जानबूझकर चलाए जा रहे नेगेटिव कैंपेन आज इंडस्ट्री में आम बात हो गई है।
‘जन नायकन‘ एक्टर विजय आखिरी फिल्म है। इसके बाद वह पूरी तरह से राजनीति में जाने वाले हैं। जाहिर है, ऐसे में फिल्म को लेकर फैंस में काफी उत्साह था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, CBFC ने शुरू में कट्स के साथ फिल्म को U/A 16+ सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की थी। मेकर्स ने सुझाव पर कुछ सीन काटे और दूसरे अन्य बदलाव भी किए। लेकिन बाद में, बोर्ड ने सर्टिफिकेशन रोक दिया गया। बोर्ड का कहना है कि उन्हें शिकायत मिली है कि फिल्म में कुछ सीन धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं।
‘धर्म और राजनीति का हमेशा फिल्मों से कुछ न कुछ लेना-देना’
‘हीरामंडी’ फेम जेसन शाह ने ‘जन नायकन’ विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में कहा, ‘मैं सच में बहुत उत्साहित था कि फिल्म 9 तारीख को रिलीज हो रही है। मुझे सर्टिफिकेशन के बारे में 100 प्रतिशत पता नहीं है कि क्या चल रहा है। मैंने असल में कभी भी इस प्रोसेस को पूरी तरह से नहीं समझा। यह मेरा डिपार्टमेंट नहीं है। लेकिन धर्म और राजनीति का हमेशा फिल्मों से कुछ न कुछ लेना-देना होता है।’
जेसन शाह बोले- वोट दिया है तो आराम से बैठें और खुश रहें
जेसन ने आगे कहा, ‘जिसे भी रूलिंग पार्टी के तौर पर वोट दिया जाता है, हम देश को उनके हाथों में देते हैं। वो ये तय करते हैं कि क्या होगा। आपके वोटिंग से इस तरह के फैसले होते हैं, इसलिए अगर आपने ऐसा किया है, तो आराम से बैठें और खुश रहें।’
इंडस्ट्री में नेगेटिव कैम्पेन पर जेसन शाह ने कही दो टूक बात
एक्टर ने आगे इंडस्ट्री में फिल्मों और एक्टर्स के खिलाफ जानबूझकर चलाए जा रहे नेगेटिव कैम्पेन पर भी बात की। उन्होंने कहा, ‘टेक्नोलॉजी के साथ बोलने की आजादी, यह सबमें सबसे खतरनाक कॉम्बिनेशन है। एक एक्टर के तौर पर, आप खुद को खतरे में डालते हैं और यह मानते हैं कि आप एक पब्लिक फिगर हैं और पब्लिक की नजर में रहेंगे। अगर आपको यह पसंद नहीं है, तो एक्टर मत बनो। बहुत से एक्टर पैसा, शोहरत और सभी अच्छी चीजें देखते हैं, लेकिन उन्हें सिर से पैर तक स्क्रूटनी के लिए भी तैयार रहना चाहिए। लोग आपके बारे में वही कहेंगे जो वे महसूस करते हैं, जब वे इसके लिए पैसे देते हैं, तो क्यों नहीं?’
‘जन नायकन’ में सशस्त्र बलों वाले सीन के खिलाफ शिकायत
जानकारी के लिए बता दें कि ‘जन नायकन’ के सर्टिफिकेशन में देरी के बाद मामला मद्रास हाई कोर्ट पहुंचा था। वहां 9 जनवरी को अपने आदेश में जस्टिस पीटी आशा की सिंगल बेंच ने सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट जारी करने को कहा। लेकिन फिर डिविजन बेंच ने इस पर अंतरिम रोक लगा दी। मामला CBFC चेयरपर्सन की उस चिट्ठी को लेकर अटका है, जिसमें उन्होंने कथित शिकायत मिलने के बाद फिल्म को दोबारा रिव्यू कमेटी के पास भेज दिया। उनका कहना है कि फिल्म के खिलाफ मिली शिकायत में कहा गया है कि इसमें सशस्त्र बलों को दिखाने वाले हिस्से धार्मिंक भावनाओं को आहत कर सकते हैं।
21 जनवरी को मद्रास हाई कोर्ट में ‘जन नायकन’ पर सुनवाई
बाद में चीफ जस्टिस एम एम श्रीवास्तव और जी अरुल मुरुगन की डिविजन बेंच ने CBFC द्वारा दायर अपील पर, सिंगल जज के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी, जिससे फिल्म की रिलीज रुक गई है। मौजूदा स्थिति यह है कि इस मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को मद्रास हाई कोर्ट में होगी। इस बीच, मेकर्स ने सोमवार को हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील भी की है।





