भोपाल के तुलसी ग्रीन प्रोजेक्ट में धूल-शोर के खिलाफ एनजीटी पहुंचे रहवासी, कहा- बिगड़ रही सेहत

भोपाल। शिवाजी नगर क्षेत्र में हाउसिंग बोर्ड के ‘तुलसी ग्रीन प्रोजेक्ट’ में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की शिकायत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) तक पहुंची है। अब एनजीटी ने शिकायतों की जांच के लिए एक संयुक्त जांच कमेटी का गठन किया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ‘तुलसी टावर संस्था’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने पाया कि प्रोजेक्ट साइट पर धूल रोकने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
मुरम, रेत और सीमेंट खुले में डंप किए जा रहे हैं। ‘वेट-जेट’ सिस्टम और ग्रीन नेट (सुरक्षा जाली) न होने के कारण धूल के महीन कण पड़ोस के टावरों में रहने वाले बुजुर्गों और बच्चों के फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं। साथ ही रात 10 से सुबह छह बजे तक भारी मशीनें, ड्रिलिंग और पत्थर काटने का काम जारी रहता है।
टावरों के बीच ‘कैन्यन इफेक्ट’ (शोर का गूंजना) की वजह से ध्वनि का स्तर निर्धारित 45 डेसीबल की सीमा को पार कर गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है और बुजुर्गों में मानसिक तनाव व हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को
एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए समिति गठित की है। इसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भोपाल नगर निगम के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह कमेटी चार सप्ताह के भीतर निर्माण स्थल का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। निर्माण स्थल पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कमी और नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो भारी जुर्माना और काम रोकने की कार्रवाई भी की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी।
शाम 6 बजे बंद कर दिया जाता है निर्माण कार्य
निर्माण में सभी सुरक्षा और पर्यावरणीय नियमों का पालन किया जा रहा है। निर्माण कार्य भी शाम छह से साढ़े छह बजे तक बंद कर दिया जाता है। ट्रिब्यूनल को इससे जुड़ी जानकारी दी जाएगी। – प्रकाश संगम नेरकर, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, हाउसिंग बोर्ड





