रूस यूक्रेन पीस प्लान: ट्रंप के शांति प्लान पर चर्चा के बीच पुतिन ने जेलेंस्की को दी सीधी धमकी, क्या होगा अगला कदम!

मॉस्को: रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि यूक्रेन में जंग खत्म करने के लिए अमेरिकी प्रस्ताव पर बातचीत एक शुरुआत है। यह भविष्य के मजबूत शांति समझौतों का आधार बन सकता है। पुतिन ने कहा कि हमें इस पर गंभीरता से बात करने की जरूरत है। वार्ता को अहमियत देने के साथ ही पुतिन ने यूक्रेन को सेना वापस बुलाने के लिए भी धमकाया है। उन्होंने कहा कि अगर यूक्रेनी फौज अपने कब्जे वाले इलाकों से हट जाती है तो चीजें बेहतर की ओर जाएंगी। यूक्रेन में जंग तभी खत्म होगी, जब यूक्रेनी सैनिक उन इलाकों से हट जाएंगे जिन पर रूसी फौज का कब्जा है। अगर वे नहीं हटते हैं तो फिर हमारी सेना ये काम करेगी।

व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि यूक्रेन युद्ध खत्म करने का अमेरिकी प्लान आने वाले एग्रीमेंट का बेस बन सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अगले हफ्ते डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की अगुवाई अमेरिकी डेलीगेशन मॉस्को आ रहा है। उन्होंने इसके अच्छे नतीजे निकलने की उम्मीद जताते हुए कहा कि क्रेमलिन ‘सीरियस डिस्कशन’ के लिए तैयार है। हालांकि पुतिन ने साफ किया कि फाइनल समझौते पर बात करना अभी जल्दीबाजी होगी।

रूस का यूक्रेन के बड़े हिस्से पर कब्जा

रूस का इंटरनेशनल लॉ के तहत सॉवरेन यूक्रेन के हिस्से के तौर पर पहचाने जाने वाले 20 फीसदी इलाके पर कब्जा किए हुए है। इसमें तकरीबन पूरा लुहान्स्क इलाका, डोनेट्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों के कुछ हिस्से शामिल हैं। मॉस्को यूक्रेन से इन चारों इलाकों को पूरी तरह से सरेंडर करने की मांग कर रहा है।रूस ने हाल के हफ्तो में पूर्वी यूक्रेन की फ्रंटलाइन पर कुछ बढ़त हासिल की है। इसमें सबसे अहम पोक्रोवस्क शहर के आसपास के इलाके हैं। यूक्रेन के कुछ इलाकों के रूस को सौंपने के लिए राजी होने की संभावना बेहद कम है। इसमें कई भारी सुरक्षा वाले इलाके शामिल हैं, जिन्हें यूक्रेनी सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।

अमेरिका का प्रस्ताव

अमेरिका ने करीब चार साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। इस पर यूक्रेन और उसके सहयोगी देशों ने जिनेवा में बात की है। दूसरी ओर अमेरिका के पीस प्लान पर रूस में भी चर्चा है। प्लान पर चर्चा के लिए ट्रंप के दूत विटकॉफ मॉस्को जाएंगे। आने वाले दिनों में इस पर बातचीत बढ़ने की उम्मीद है। वार्ता फेल होने पर रूस के हमले तेज होने का अंदेशा है।

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