संजय मिश्रा को पिता की डायरी पढ़ लगा था सदमा, फिल्में छोड़ ढाबे पर धोने लगे बर्तन, बताया वाकया

एक्टर संजय मिश्रा आज देश के पॉपुलर सपोर्टिंग एक्टर्स में गिने जाते हैं। 62 साल की उम्र में भी वह लगातार काम कर रहे हैं और जल्द ही फिल्म ‘वध 2’ में नजर आएंगे। हाल ही इसका ट्रेलर रिलीज किया गया, जिसे काफी पसंद किया जा रहा है। आज संजय मिश्रा के पास काम की कमी नहीं, पर कभी ऐसा भी वक्त था, जब वह फिल्में और एक्टिंग छोड़कर ऋषिकेश चले गए थे। वहां वह एक ढाबे पर काम करने लगे थे। यह तब की बात है, जब संजय मिश्रा के पिता का निधन हुआ था। उसी दौरान खुद एक्टर का भी एक ऑपरेशन हुआ था, और डॉक्टरों ने कह दिया था कि सर्जरी सफल नहीं हुई तो वह बच नहीं पाएंगे।

संजय मिश्रा ने एक इंटरव्यू में अपनी जिंदगी के उस मुश्किल दौर के बारे में बात की है। संजय ने पिता के आखिरी दिनों के बारे में भी बात की और कहा कि उन्हें लगने लगा था कि उन्होंने पिता को शर्मिंदा किया है। संजय मिश्रा के मुताबिक, यह बात उनके पिता ने अपनी डायरी में भी लिखी थी।

संजय मिश्रा बोले, ‘मैं ऋषिकेश भाग गया, ढाबे पर काम करने लगा’

संजय मिश्रा ने प्रखर गुप्ता को दिए इंटरव्यू में कहा, ”ऑल द बेस्ट’ की शूटिंग के दौरान मेरा ऑपरेशन हुआ। उसके बाद मैं ऋषिकेश भाग गया। वहां एक ढाबे पर एक बुजुर्ग व्यक्ति चाय और मैगी बनाते थे और उस समय मैं खाली था। मेरी सेहत ठीक नहीं थी, इसलिए मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था, और मेरे पिता का भी हाल ही में निधन हो गया था। मैं वहां बर्तन धोने लगा। ‘ संजय मिश्रा ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें एक गंभीर बीमारी हुई थी। डॉक्टरों ने उनके पेट से 15 लीटर पस निकाला था।

‘डॉक्टर ने कहा सर्जरी असफल हुई तो डेढ़ दिन जिंदा बचोगे’

संजय ने फिर बताया कि वह तो मरने वाले थे। डॉक्टरों ने उनसे कह दिया था कि अगर उनका ऑपरेशन सफल नहीं हुआ, तो वह मुश्किल से एक या डेढ़ दिन जी पाएंगे। एक तो यह ट्रॉमा और उसके ऊपर अस्पताल मिलने आने वालों ने भी संजय मिश्रा के लिए बुरी स्थिति पैदा करती। एक्टर के मुताबिक, जो भी उनसे मिलने अस्पताल में आता, वो उन्हें उन लोगों के बारे में बताता, जो उसी बीमारी से मर गए, जो संजय मिश्रा को हुई थी। तब संजय बोले, ‘मैंने पिता से कहा कि अगर मैं इन लोगों से मिलता रहा तो मैं दवाइयों से ही मर जाऊंगा। तब पिता जी ने लोगों को मुझसे मिलने से रोक दिया।’

संजय मिश्रा का अस्पताल से डिस्चार्ज और पिता की मौत, 3 दिन पुराना चिकन खा लिया

संजय ने फिर पिता की मौत पर बात की, और बोले, ‘मुझे अस्पताल से छुट्टी मिल गई और उसके 8-10 दिन बाद मेरे पिता का निधन हो गया। एक फैन ने चिकन की डिश बनाई थी और मैंने वो पिता जी को भेज दी। वो फैन कुक था और पिता ने उस डिश को बनने के तीन दिन बाद खाया। उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। मैंने पिताजी से पूछा कि आप तीन दिन पुराना चिकन कैसे खा सकते हैं? और उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हारी सलाह की जरूरत नहीं है। ये मेरे पिता के मुझसे कहे गए आखिरी शब्द थे।’

जब संजय मिश्रा के कारण पिता को हुई शर्मिंदगी, डायरी में किया था जिक्र

संजय मिश्रा ने फिर वह वाकया बताया, जब उनके पिता को उनके कारण शर्मिंदगी महसूस हुई थी। यह तब की बात थी, जब एक्टर पिता को अपनी फिल्म ‘आलू चाट’ दिखाने ले गए थे। उस वाकये को याद करते हुए संजय ने कहा, ‘अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद मेरे पिता मुझे मेरी फिल्म ‘आलू चाट’ दिखाने ले गए। वह चाहते थे कि मैं जल्दी ठीक हो जाऊं और फिल्मों में एक्शन करना शुरू कर दूं। लेकिन थिएटर में लोग मेरे साथ फोटो खिंचवाने के लिए मुझे घेरने लगे, और मैं उन पर चिल्लाने लगा। मैंने उन्हें गालियां दीं और मेरे घर में तो ‘कम्बख्त’ शब्द बोलना भी बड़ी बात है।’

पिता पर चिल्लाए थे संजय मिश्रा- आपको क्या पता? आप जो चाहो बोल रहे हो

संजय मिश्रा ने आगे बताया, ‘मेरे पिता अपने साथियों को भी साथ लाए थे। मेरे पिता ने मुझसे कहा कि मुझे ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, और मैंने उन पर चिल्लाते हुए कहा कि आपको क्या पता? आप जो चाहो बोल रहे हो। उस समय मैं भारी एंटीबायोटिक्स ले रहा था और कुछ खाया भी नहीं था। बाद में, पिता की मौत के बाद जब मैंने उनकी डायरी देखी, तो उन्होंने लिखा था कि मैंने उन्हें शर्मिंदा किया था। उस समय, मैं चाहता था कि वह एक बार अपनी आंखें खोलें ताकि मैं कह सकूं कि मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था।’

पिता की मौत के बाद हरिद्वार और ऋषिकेश चले गए

संजय मिश्रा उसके बाद इस कदर टूट गए थे कि वह आध्यात्म की ओर मुड़ गए। वह हरिद्वार और ऋषिकेश निकल गए। एक्टर बोले, ‘मैंने सोचा कि अगर हम सबको मरना ही है, तो हम इतनी भागदौड़ क्यों कर रहे हैं? मैं अकसर गायब हो जाता हूं, अपना फोन नहीं उठाता। मैंने लोनावला में एक जगह ली है और मैं वहां जाता हूं, और कोशिश करता हूं कि मेरे दिमाग में कोई विचार न हों।’

संजय मिश्रा का करियर

संजय मिश्रा के करियर की बात करें, तो उन्होंने साल 1995 में फिल्म ‘ओह डार्लिंग! ये है इंडिया’ से एक्टिंग डेब्यू किया था। उन्होंने ‘सत्या’, ‘दिल से’, ‘बंटी और बबली’, ‘अपना सपना मनी मनी’, ‘ऑल द बेस्ट’, ‘गोलमाल: फन अनलिमिटेड’ और ‘फंस गए रे ओबामा’ जैसी फिल्में कीं। वह ‘आंखों देखी’ और ‘वध’ जैसी फिल्मों में भी नजर आए। उन्होंने बेस्ट एक्टर के लिए दो बार फिल्मफेयर का क्रिटिक्स चॉइस अवॉर्ड जीता।

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