इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जाने से पहले क्वारंटीन हुए शुभांशु शुक्ला:बोले- पूरा भरोसा कि मिशन सफल होगा

इंडियन एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला एक्सिओम मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) जाने से पहले क्वारंटीन में चले गए हैं। उनके साथ मिशन के अन्य तीन एस्ट्रोनॉट ने भी शनिवार को क्वारंटीन में प्रवेश किया।

शुभांशु ने कहा- मुझे पूरा भरोसा है कि एक्सिओम मिशन सफल होगा। यह कमर्शियल स्पेस फ्लाइट के लिए मील का पत्थर साबित होगा। एक्सिओम स्पेस ने एक कार्यक्रम में मिशन पर जाने वाले क्रू को विदाई दी।

दरअसल, अंतरिक्ष में जाने से पहले क्वारंटीन एक जरूरी फेज होता है। इसमें पूरे क्रू को आइसोलेशन में रखा जाता है, ताकि वो पूरी तरह से स्वस्थ्य रहे और मिशन के दौरान उन्हें कोई संक्रमण ना हो।

एक्सिओम मिशन 4 में चार देशों के चार एस्ट्रोनॉट 8 जून को 14 दिन के लिए स्पेस स्टेशन जाने वाले हैं। नासा और इसरो के बीच हुए एग्रीमेंट के तहत ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को इस मिशन के लिए चुना गया है।

शुभांशु के साथ तीन और एस्ट्रोनॉट जाएंगे

एक्सिओम 4 मिशन के चालक दल में भारत, पोलैंड और हंगरी के मेंबर शामिल हैं। स्लावोज़ उज़्नान्स्की 1978 के बाद स्पेस में जाने वाले पोलैंड के दूसरे एस्ट्रोनॉट होंगे। टिबोर कापू 1980 के बाद स्पेस में जाने वाले हंगरी के दूसरे एस्ट्रोनॉट होंगे। अमेरिकी की पैगी व्हिटसन का यह दूसरा कॉमर्शियल ह्यूमन स्पेस फ्लाइट मिशन है।

शुभांशु शुक्ला: NDA क्लियर करके IAF पायलट बने

शुभांशु शुक्ला मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं। इनकी की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई अलीगंज, लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से पूरी हुई। 12वीं के बाद उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) का एंट्रेंस एग्जाम क्लियर किया और यहीं से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।

NDA भारत में सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) के लिए ऑफिसर कैडेट्स को प्रशिक्षण देने वाली एक प्रमुख संस्था है। ये ट्रेनिंग के साथ-साथ एकेडमिक डिग्री भी देती है, जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली से एफिलिएटेड होती है।

2,000 घंटे से अधिक का फ्लाइंग एक्सपीरियंस

शुभांशु को 17 जून, 2006 को भारतीय वायुसेना के फाइटर विंग में शामिल किया गया। वे एक अनुभवी फाइटर और टेस्ट पायलट हैं। उनके पास 2,000 घंटे से अधिक का फ्लाइंग एक्सपीरियंस है। उन्होंने सुखोई-30 MKI, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर और An-32 जैसे लड़ाकू विमानों को उड़ाया है।

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