यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए भारत पर टैरिफ जरूरी… अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बोला ट्रंप प्रशासन, जानें क्या कहा

वॉशिंगटन: अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने अदालती दस्तावेजों में चेतावनी दी है कि भारत समेत अन्य देशों पर टैरिफ कम करने से अमेरिका को व्यापारिक प्रतिशोध का सामना करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के टैरिफ को गैरकानूनी बताने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील में टैरिफ को जरूरी बताया है और कहा कि इसे कम करने से विदेशों में शांति स्थापित करने के प्रयासों को झटका लगेगा। इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सॉलिसिटर जनरल जॉन सॉर ने सुप्रीम कोर्ट से टैरिफ को बरकरार रखने का आग्रह किया है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील में कहा गया है कि इस मामले में दांव इससे ज्यादा नहीं हो सकता है। टैरिफ को यूक्रेन के लिए प्रयासों का एक महत्वपूर्ण पहलू और आर्थिक तबाही के खिलाफ एक ढाल बताया गया है। अदालती दस्तावेज में ट्रंप प्रशासन ने लिखा, ‘हमने हाल ही में यूक्रेन में रूस के युद्ध से जुड़े पहले से मौजूद राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने के लिए रूसी ऊर्जा उत्पादों की खरीद के लिए भारत के खिलाफ टैरिफ को अधिकृत किया है।’ इसमें कहा गया कि टैरिफ को हटाने से अमेरिका ‘आर्थिक तबाही के कगार पर पहुंच जाएगा।’
भारत के ऊपर ट्रंप का भारी टैरिफ
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत के ऊपर 50 प्रतिशत टैरिफ को लागू किया था। इसमें 25 प्रतिशत टैरिफ व्यापार घाटे का हवाला देते हुए लगाया गया है, जबकि 25% अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर लगाया गया है। यह किसी भी एशियाई देश पर ट्रंप प्रशासन का वर्तमान में सबसे ज्यादा टैरिफ है।
अदालत ने टैरिफ को बताया गैरकानूनी
पिछले महीने के आखिर में अमेरिकी संघीय सर्किट अपील कोर्ट ने टैरिफ के खिलाफ 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाया था। इसमें कहा गया था कि ट्रंप ने व्यापक शुल्क लगाने के लिए आपातकालीन आर्थिक शक्तियों का प्रयोग करके अपने अधिकार का अतिक्रमण किया है। प्रशासन ने फैसले के विरोध में कहा है कि ये उपाय शांति और अभूतपूर्व आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा दे रहे हैं और साथ ही देशों को वॉशिंगटन के साथ नए व्यापार ढांचों की ओर बढ़ा रहे हैं।





