शहर में बढ़ेंगी 15 ईवी स्वीपिंग मशीनें, तक प्रदूषण होगा कम, निजी कंपनी करेगी संचालन

भोपाल, भोपाल में प्रदूषण का मुख्य कारण रोड पर उड़ने वाली धूल है। इसके कारण ही पीएम-2.5 और पीएम-10 बढ़ता है। इसे कम करने के लिए अब नगर निगम अब 15 और स्वीपिंग मशीनें रोड पर उतारने जा रहा है। ये पूरी तरह इलेक्ट्रिकल होंगी।
पहले से 10 डीजल स्वीपिंग मशीनें चल रही हैं। अब इनकी संख्या 25 हो जाएगी। इससे सर्विस रोड और कनेक्टिंग रोड पर भी सफाई हो सकेगी। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पुणे की एक संस्था से भोपाल के प्रदूषण को लेकर स्टडी करवाई थी।
इसकी रिपोर्ट साल 2023 में सबमिट हुई थी। इसमें बताया गया था कि भोपाल में प्रदूषण के लिए 40 फीसदी तक जिम्मेदार सड़क पर उड़ने वाली धूल है। इसे कम करने के लिए रोड की सफाई से लेकर पानी का छिड़काव करना जरूरी है। इसी कड़ी में निगम ने स्वीपिंग मशीनें बढ़ाने का निर्णय लिया है।
- पूरी तरह से इलेक्ट्रिक है और हाइड्रॉलिक रूप से नियंत्रित होता है।
- धूल हटाने के लिए तीन चरण वाली शुष्क और गीली पृथक्करण प्रणाली।
- ऑपरेटर के लिए कैब में हीटिंग और कूलिंग एयर-कंडीशनिंग के साथ सभी कंट्रोल स्विच दिए गए हैं।
- सफाई उपकरण में बाधाओं से टकराने पर स्वचालित बचाव और रीसेट फंक्शन दिया गया है।
- इसमें 72वीं, 600एएच की लिथियम बैटरी का विकल्प है, जिसकी रेंज 80-100 किलोमीटर है और यह 5-10 घंटे तक लगातार काम कर सकती है।
- 5 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से सफाई कर सकती है।
- यह 25 हजार वर्ग मीटर प्रति घंटे से सफाई कर सकती है।
प्रति किमी के हिसाब से कंपनी को देंगे शुल्क
नगर निगम ने इन मशीनों के संचालन के लिए सेवा प्रदाताओं से ईओआई बुलाए हैं। निजी कंपनी इनका संचालन करेगी। लागत की 40% राशि नगर निगम खर्च करेगा, जबकि शेष 60% और संचालन की जिम्मेदारी कंपनी उठाएगी। निगम प्रति किमी के हिसाब से कंपनी को शुल्क देगा। तय समय सीमा के बाद वाहनों को बेचा जाएगा।
अभी एक गाड़ी पर हर साल 30 लाख तक खर्च
अभी निगम दो जोन के बीच एक गाड़ी चला रहा है। इससे सिर्फ मेन रोड ही साफ हो पाती हैं। डीजल से लेकर कर्मचारी मिलाकर निगम एक गाड़ी पर ही हर साल 25 से 30 लाख रुपए खर्च कर रहा है। नई व्यवस्था में यह खर्च कंपनी को उठाना पड़ेगा।
40% प्रदूषण सिर्फ धूल से पुणे की संस्था से भोपाल में प्रदूषण के प्रमुख कारणों का सर्वे कराया था। इसमें धूल को प्रदूषण के लिए करीब 40% कारण माना गया था। इसके बाद वाहनों का धुआं और अंत में सबसे कम कचरा आदि जलना पाया गया था। अगर स्वीपिंग मशीन सही से काम करती हैं, तो करीब 30% प्रदूषण कम किया जा सकेगा।
– बृजेश शर्मा, रीजनल ऑफिसर, पीसीबी भोपाल
15 स्वीपिंग मशीनें बढ़ा रहे हैं रोड की सफाई के लिए 15 स्वीपिंग मशीनें बढ़ाई जाएंगी। इसका संचालन कंपनी के माध्यम से किया जाएगा। इससे शहर के प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। -संस्कृति जैन, कमिश्नर नगर निगम, भोपाल





