बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के लिए बढ़ा संकट, आर्मी चीफ जनरल जमान के ‘दरबार’ से बढ़ी अटकलें, अगले 48 घंटे होने वाले हैं बेहद अहम

ढाका: बांग्लादेश एक बार फिर बड़े राजनीतिक संकट की ओर बढ़ रहा है। बीते एक सप्ताह में हुई घटनाओं ने इसकी आशंका तेज कर दी है। हाल ही में बांग्लादेश के सैन्य अधिकारियों के साथ बंद हाल में बैठक (दरबार) के दौरान आर्मी चीफ वकार उज-जमान की टिप्पणियों ने अटकलों को हवा दे दी है। बैठक में आर्मी चीफ की चुनाव और म्यांमार में कॉरिडोर को लेकर सख्त टिप्पणी ने यूनुस को दबाव में ला दिया है। इस बीच मोहम्मद यूनुस ने इस्तीफे की पेशकश की खबरों से अस्थिरता की भावना और भी गहरी हो गई है।

यूनुस को इस्तीफे से रोकने की कोशिश

सेना प्रमुख की कड़ी टिप्पणी के बाद अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और छात्रों की नवगठित नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता नाहिद इस्लाम के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। नाहिद ने बताया कि मोहम्मद यूनुस ने इस्तीफा देने की पेशकश की है। इसके बाद राजनीतिक दलों और उनके नेताओं की तरफ कई बयान दिए गए, जिसमें यूनुस से इस्तीफा न देने का अनुरोध किया गया। इसके साथ ही सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की गई।

कहा जा रहा है कि मोहम्मद यूनुस इस्तीफे की धमकी देकर सेना प्रमुख को विलेन दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। सेना प्रमुख जमान ने कमांडिंग अफसरों के साथ बैठक में दिसम्बर 2025 तक चुनाव कराए जाने और चुनी हुई सरकार को सत्ता सौंपने की इच्छा जताई थी। मोहम्मद यूनुस जानते हैं कि चुनाव के बाद वे सत्ता में नहीं बने रह पाएंगे और इसीलिए वे इसे आगे के लिए टालने में लगे हुए हैं।

सहानुभूति जुटाने की यूनुस की चाल

इस बीच बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (BNP) ने चुनाव की मांग तेज कर दी है। न्यूज 18 की रिपोर्ट में बीएनपी के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से कह गया कि यूनुस अब सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जो दबाव में आने पर आसानी से इस्तीफा दे दें। हम केवल एक उचित चुनाव की योजना की मांग कर रहे हैं। अंतरिम सरकार इस पर टालमटोल कर रही है। नेता ने नाम न बताने की शर्त पर ये बात कही।

अगले 48 घंटे होंगे बेहद अहम

इस बीच मोहम्मद यूनुस सरकार ने बांग्लादेश के विदेश सचिव जशीम उद्दीन को हटा दिया। वे म्यांमार में कॉरिडोर बनाए जाने के विरोध में थे। खास बात ये है कि आर्मी चीफ ने भी कमांडिंग अफसरों के साथ बैठक में इस गलियारे का विरोध किया था। हाल ही में ढाका में सेवा देने वाले एक राजनयिक ने कहा है कि अगले 48 घंटे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि बहुत सारे बदलाव हो रहे हैं। क्या देश फिर से नागरिक-राजनीतिक अशांति की ओर बढ़ रहा है, ये देखना अभी बाकी है। लेकिन इतिहास गवाह है कि बांग्लादेश के राजनीतिक ढांचे में बदलाव हिंसा के बगैर कभी नहीं आए।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button