कर्ज नहीं चुका पाई ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’, दूसरी बार हुई दिवालिया, भारतीय के हाथ में है कमान

नई दिल्ली: ईस्ट इंडिया कंपनी … लंदन की वह कंपनी जो कभी भारत पर राज करती थी, आज कर्ज में डूबी हुई है। स्थिति ऐसी है कि यह कंपनी दोबारा दिवालिया हो गई है। अभी इसकी कमान लंदन में रहने वाले भारतीय के हाथ में है। यह कंपनी कर्ज लौटाने और कुछ भुगतान करने में असफल रही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इस बार यह कंपनी स्वैच्छिक परिसमापन (वॉलंटरी लिक्विडेशन) में चली गई है और उस पर करीब 10 लाख पाउंड (करीब 12 करोड़ रुपये) का कर्ज है। पहली बार मूल ईस्ट इंडिया कंपनी 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद समाप्त हुई थी। साल 1858 में भारत पर उसका कंट्रोल ब्रिटिश शासन को सौंप दिया गया था और 1874 में उसे औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया।

मात्र 7400 रुपये की संपत्ति

लंदन स्थित इस कंपनी के डॉक्यूमेंट्स कंपनीज हाउस में दाखिल किए गए हैं, जिनसे पता चलता है कि कंपनी पर कुल 10 लाख पाउंड से अधिक की देनदारी है। हैरानी की बात यह है कि कंपनी की कुल संपत्ति मात्र 60.39 पाउंड (करीब 7400 रुपये) बताई गई है।

कंपनी पर कितनी देनदारी?

  • 6,11,279 पाउंड (7.5 करोड़ रुपये) अपनी मूल कंपनी EIC Group (ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स) का
  • 1,63,105 पाउंड (2 करोड़ रुपये) कर्मचारियों के वेतन के रूप में
  • 1,93,789 पाउंड (2.4 करोड़ रुपये) ब्रिटेन के टैक्स विभाग को

भारतीय ने खरीदी थी कंपनी

  • ईस्ट इंडिया कंपनी का साल 2005 में एक तरह से पुनर्जीवन हुआ था।
  • इस आधुनिक ईस्ट इंडिया कंपनी को मुंबई के व्यवसायी संजीव मेहता ( Sanjiv Mehta ) ने साल 2005 में खरीदा था।
  • उन्होंने शेयर धारकों के एक ग्रुप से मूल कंपनी के कोट ऑफ आर्म्स, प्रतीक चिन्ह आदि संपत्तियों के अधिकार हासिल किए।
  • साल 2010 में उन्होंने करीब 1 करोड़ पाउंड का निवेश कर उन्होंने इसे एक लग्जरी लाइफस्टाइल ब्रांड में बदल दिया, जो चाय, चॉकलेट, एशियाई फूड, ज्वेलरी, सिक्के और होमवेयर बेचता था।

कौन हैं संजीव मेहता?

संजीव मेहता का जन्म गुजरात के जैन परिवार में हुआ था। वह बाद में वह साल 1989 में ब्रिटेन चले गए।। उन्होंने मुंबई के सिडेनहल कॉलेज से पढ़ाई की है। साथ ही वह आईआईएम अहमदाबाद के भी छात्र रहे हैं।

साल 2010 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने लंदन के मेफेयर में अपना फ्लैगशिप स्टोर खोला, जिसे बाद में बॉन्ड स्ट्रीट स्थानांतरित किया गया। उस समय मेहता ने कहा था, ‘मैं भारतीय हूं। इसलिए मेरे लिए यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह उस कंपनी को वापस खरीदना है जिसने भारत पर अपना अधिकार जमा रखा था।’ अब यह स्टोर खाली पड़ा है और वेबसाइट भी गायब हो चुकी है।

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