सदन में छाया पदाेन्नति में आरक्षण का मुद्दा, सवालों में घिरीं मंत्री रजवाड़े

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को प्रश्नकाल में पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विधायक प्रबोध मिंज के सवालों को लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े पूरे समय विपक्ष के निशाने पर रहीं। इस दौरान केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के प्रावधानों को लेकर विभागीय अधिकारियों की जानकारी स्पष्ट नहीं होने से मंत्री को जवाब देने में कठिनाई हुई, जिसके बाद सभापति को हस्तक्षेप करना पड़ा।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक प्रबोध मिंज ने पूछा कि क्या दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 34 और छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन अधिकार नियम 2023 की धारा 27 के तहत वर्ष 2016 से दिव्यांग शासकीय कर्मचारियों को पदोन्नति में न्यूनतम 4 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि राज्य में यह प्रावधान कब से लागू होगा और वर्ष 2022 से अब तक इस संबंध में कितने आवेदन प्राप्त हुए तथा विभाग ने क्या कार्रवाई की।
विधायक मिंज ने कहा कि भर्ती नियमों और पदोन्नति के संबंध में केंद्र सरकार तथा सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं। उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार सीधी भर्ती और पदोन्नति दोनों में आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन राज्य में दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में इसका लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि पदोन्नति में आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया कब शुरू होगी।
इस पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जवाब देते हुए कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार केंद्र सरकार ने सीधी भर्ती में 4 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है, जबकि छत्तीसगढ़ में 3 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इस पर विधायक मिंज ने कहा कि उनका सवाल पदोन्नति में आरक्षण को लेकर है।
सवाल-जवाब के दौरान स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर सभापति धरमलाल कौशिक को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने मंत्री से कहा कि विधायक का मूल प्रश्न यह है कि केंद्र सरकार के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य में दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिल रहा है या नहीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देने और मामले की जांच कर नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा।
इस पर विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार पदोन्नति में 3 की जगह 4 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी मंत्री को सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस विषय पर एक वर्ष पहले भी सदन में सवाल उठाया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

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