बैंकों में पैसा जमा करने वालों की संख्या बढ़ी:मप्र में बैंकों को हर 100 में 12 कर्ज डूबते दिख रहे

मध्यप्रदेश में बैंकों में पैसा जमा करने वालों की संख्या और भरोसा, दोनों लगातार बढ़ रहे हैं। 2024 में देशभर में जमा में औसतन 11.5% की वृद्धि हुई, जबकि मध्यप्रदेश में 7.97% की ही ग्रोथ रही। प्रदेश के लोग साल-दर-साल करोड़ों रुपए बैंकों में रख रहे हैं। लेकिन जब यही लोग अपने कारोबार, खेती या निजी जरूरतों के लिए लोन मांगते हैं, तो बैंक पीछे हट जाते हैं। पूरे प्रदेश का औसत क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो सिर्फ 58.76% है, यानी लोग जितना पैसा जमा कर रहे हैं, उसका आधे से भी थोड़ा ज्यादा हिस्सा ही लोन के रूप में लौट रहा है।
दूसरी तरफ, कृषि क्षेत्र में हर 100 में 12 लोन पर न वसूली हो रही, न ब्याज मिल पा रहा है। इसी वजह से बैंकों का भरोसा लोन देने से पहले ही डगमगाने लगता है। मगर सवाल ये है कि अगर जमा करते समय बैंक को लाभ दिखता है, तो लोन देते वक्त जोखिम ही क्यों दिखता है? जानकार बताते हैं कि कृषि क्षेत्र में डूबत कर्ज की दर 11.89% और एमएसएमई सेक्टर में 5.41% है, फिर भी ये दोनों ही वो क्षेत्र हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को खड़ा करते हैं। बैंकों को इन क्षेत्रों में रोक के बजाय रणनीति से काम लेना होगा।
क्या है सीडी रेशियो और एनपीए रेट? सीडी रेशियो बताता है कि बैंक जितना पैसा जमा करवा रहे हैं, उसका कितना हिस्सा लोन के रूप में दे रहे।मध्यप्रदेश में यह रेशियो 58.76% है, जबकि देश का औसत 75.91%। कृषि क्षेत्र में एनपीए 11.89% है। यानि करीब हर 9वां लोन डूब रहा। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भी एनपीए 9.3% तक पहुंच चुका है। शिक्षा में यह 8% और स्वास्थ्य क्षेत्र में यह 5.6% है।
पिछले साल के मुकाबले 5% ज्यादा कर्ज
मप्र के जिन 22 जिलों में सीडी रेशियो में 5% से ज्यादा बढ़त दर्ज की गई उनमें आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, राजगढ़, खरगोन, अशोकनगर, रायसेन, झाबुआ, विदिशा, गुना, सिवनी, हरदा, देवास, मुरैना, उज्जैन, धार, खंडवा, रीवा, सागर, नीमच, सीहोर, शहडोल शामिल है। इसका मतलब ये हुआ कि इन जिलों में बैंकों ने पिछले साल के मुकाबले जमा राशि के मुकाबले 5% ज्यादा कर्ज देना शुरू किया है। वहीं पन्ना, सतना और डिंडोरी में गिरावट दर्ज की गई है। यानी इन तीन जिलों में पिछले साल की तुलना में कम कर्ज दिया जाएगा।
लोन देने में छोटे जिलों में सबसे ज्यादा हिचक
मैहर, सीहोर, अनूपपुर, पांढुर्णा जैसे जिलों का सीडी रेशियो 54% से भी कम है। यानी इन जिलों में बैंक करोड़ों जमा तो करवा रहे, लेकिन जब लोन देने की बात आती है तो गेट के बाहर तख्ती लगा देते हैं। आगर- मालवा जैसे कुछ जिले में सीडी रेशियो 200% से ऊपर है। यानी जितनी जमा राशि आई, उससे दोगुना से भी ज्यादा कर्ज बांटा गया। मगर ऐसा सिर्फ चंद जगह ही है।





