पंचकोशी परिक्रमा आज से, पौराणिक मंदिरों में दर्शन-पूजन करेंगे साधु-संत

प्रयागराज: प्रयागराज मेला प्राधिकरण, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के तत्वावधान में होने वाली पंचकोसी परिक्रमा सोमवार से शुरू होगी। तैयारियों को लेकर रविवार को जूना अखाड़ा के महामंत्री हरी गिरि महाराज ने अन्य कई संत-महात्माओं के साथ बैठक की। संगम क्षेत्र से शुरू होने वाली प्ररिक्रमा में प्रयागराज के प्रमुख तीर्थस्थलों का दर्शन-पूजन होगा। सोमवार को संगम स्नान के बाद अक्षयवट, लेटे हुए हनुमान जी, दत्तात्रेय मंदिर (जूना अखाड़ा), सरस्वती कूप, रामघाट, मौजिगिरि समाधि, सिद्धपीठ मां ललिता देवी, मां कल्याणी देवी तथा वनखंडी महादेव जैसे प्रमुख स्थलों के दर्शन किए जाएंगे।
पांच दिनों के कार्यक्रम तय
पंचकोशी परिक्रमा के दूसरे दिन मंगलवार को अरैल क्षेत्र स्थित शूलटंकेश्वर महादेव, आदि माधव, चक्र माधव, सोमेश्वर महादेव, छिवकी के गदा माधव तथा ग्राम महेवा स्थित भैरव बाबा के दर्शन होंगे। तीसरे दिन बुधवार को लालापुर के मनकामेश्वर महादेव, बीकर के पद्म माधव, देवरिया के सुजावन देव मंदिर, पनासा क्षेत्र के पराशर ऋषि आश्रम, वाल्मीकि आश्रम एवं ज्वाला देवी के दर्शन कार्यक्रम में शामिल है। वहीं, चौथे दिन गुरुवार को शंख माधव, ककरा दुबावल स्थित दुर्वासा ऋषि आश्रम, रामपुर के संकट हरण हनुमान, पाण्डेश्वर महादेव, सीताकुंड, निषादराज स्थली, नागवासुकी, वेणी माधव तथा अलोपी शंकर माता के दर्शन करवाए जाएंगे।
दंडी संन्यासियों का पूजन
चरखी दादरी आश्रम (हरियाणा) के शिविर में जूना अखाड़ा के संरक्षक हरि गिरि ने विधि-विधान से दंडी संन्यासियों का पूजन करते हुए पंचकोसी यात्रा के लिए आमंत्रित किया। इस अवसर पर दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष ब्रह्माश्रम महाराज, जूना अखाड़ा के सभापति मोहन भारती, प्रेम गिरि मौजूद रहे।
‘लोक आस्था, जन विश्वास का महोत्सव’
माघ मेले पर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित ‘चलो मन गंगा-यमुना तीर’ कार्यक्रम के अंतर्गत ‘शब्द-ब्रह्म’ संगोष्ठी में ‘लोक आस्था एवं जन विश्वास का महोत्सव’ पर विचार रखे गए। डॉ. धनजय चोपड़ा ने कहा कि माघ मेले को लेकर असंख्य कथाएं मिलती है, जो केवल जीवन में ऊर्जा का संचार ही नहीं करती है, बल्कि जीने की कला भी सिखाती है। कवि डॉ. श्लेष गौतम ने कहा कि महाकुंभ और माघ मेला हमारी सांस्कृतिक, धार्मिक तथा लोक आस्था एवं जन विश्वास के महोत्सव है। माघ मेला और कल्पवास की परंपरा वैश्विक संवाद का विषय बन चुकी है।
मालिनी अवस्थी का कार्यक्रम
कला संगम सांस्कृतिक पंडाल में सांस्कृतिक संध्या में उदयचंद परदेसी के देवी गीत के बाद वरुण मिश्रा के दल ने चलो मन गंगा यमुना तीरे सहित अन्य गीत पेश किए। कृति श्रीवास्तव के लोक नृत्य के बाद पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने चलो री गुइंया, गंगा नहाये लें सरीखे लोकगीत पेश किए। इस मौके पर मेयर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी और अपर निदेशक संस्कृति डॉ. सृष्टि धवन मौजूद रहीं।





