सतपुड़ा भवन-मंत्रालय में हो चुके है कई बार बड़े अग्निकांड:6 साल से तैयारी… फिर भी फायर सेफ्टी बिल का मानसून सत्र में आना मुश्किल

साल 2019 में केंद्र सरकार ने नए फायर सेफ्टी एक्ट का ड्राफ्ट बनाकर राज्यों को भेजा था। इसके बाद अन्य राज्यों की तरह मप्र में भी फायर एक्ट बनाने की पहल हुई पर 6 साल बाद भी कोशिश सफल नहीं हो सकी है। 28 जुलाई से शुरू हो रहे मप्र विधानसभा के मानसून सत्र में भी इस बिल के पेश होने की संभावना नहीं है।

नए एक्ट के न होने से बीते सालों में सतपुड़ा भवन, मंत्रालय में हुए भीषण अग्निकांडों के बाद कोई जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी है। साल 2022 में मप्र अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम- 2022 का ड्राफ्ट बनकर तैयार हो गया था। तबसे लगातार इस पर काम होता रहा पर ड्राफ्ट फाइनल होकर अस्तित्व में नहीं आ सका है। 2024 में नारीय प्रशासन डायरेक्ट्रेट ने ड्राफ्ट बनाकर शासन को भेजा, लेकिन इसमें कुछ बदलाव को लेकर वापस किया गया था।

ड्राफ्ट फाइनल होकर कई महीने पहले विभाग के एसीएस को मिला था। नगरीय प्रशासन में नए एसीएस संजय दुबे की आमद के बाद ड्राफ्ट विभागीय मंत्री के पास प्रशासकीय सहमति के लिए भेजा गया है। मंत्री की सहमति के बाद ड्राफ्ट जांच के लिए विधि विभाग जाएगा, फिर कैबिनेट में सहमति लेनी होगी। हालांकि, इन प्रक्रियाओं के चलते बिल का मानसून सत्र में आना तय नहीं है।

तय हो सकेगी जिम्मेदारी : व्यवसायिक भवनों के लिए फायर एनओसी लेने की समय सीमा 31 दिसंबर तक पहले ही बढ़ाई जा चुकी है। एक्ट बनने पर फायर सर्विस का अलग कैडर बनेगा और बड़े भवनों में अग्नि सुरक्षा को लेकर स्पष्ट जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

किरायेदारी संशोधन बिल भी अभी तैयार नहीं

संपत्ति के मालिकों और किरायेदारों के अधिकारों और कर्तव्यों के लिए बना आवासीय किरायेदारी संशोधन का ड्राफ्ट भी लम्बे समय से नगरीय प्रशासन डायरेक्ट्रेट और शासन के बीच अटका हुआ है। जानकारी के मुताबिक अभी डायरेक्ट्रेट ने पुराने और नए अधिनियम के प्रावधानों को लेकर तुलनात्मक चार्ट नहीं भेजा है, इसलिए मानसून सत्र में इस बिल का आना भी मुश्किल है।

मेट्रोपोलिटन रीजन अथॉरिटी बिल लाने की तैयारी में सरकार

कैबिनेट ने 20 मई को मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी एक्ट का ड्राफ्ट पास कर दिया था। सरकार की प्राथमिकता वाले इस प्रोजेक्ट का बिल सरकार विधानसभा में पेश करने की तैयारी कर चुकी है। योजना में दो बड़े परियोजना क्षेत्रों इंदौर -उज्जैन -देवास – धार के अलावा भोपाल -सीहोर-रायसेन -विदिशा -ब्यावरा को लेकर तैयारी हो रही है।

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