होली में आप गला तर कर सकें, इसके लिए श्रीलंका और UAE से हा रहा है इसका आयात

नई दिल्ली: अगले मार्च में होली है। इसी के साथ भारत में गर्मी का आगाज हो जाता है। होली के अवसर पर न सिर्फ एयरेटेड ड्रिंक की खपत बढ़ जाती है बल्कि अल्कोहलिक बेवरेज की भी मांग बढ़ जाती है। बात चाहे एयरेटेड ड्रिंक की हो या बीयर की, हर चौथा व्यक्त इन बेवरेज को कैन (Aluminium Can) में खरीदता है। लेकिन इस समय देश में कैन की भीषण तंगी चल रही है। इसलिए बेवरेज निर्माता अभी से ही श्रीलंका और संयुक्त अरब अमिरात (UAE) जैसे देशों से आयात बढ़ा दिया है।

कैन की लगातार दूसरे साल कमी

भारत में बेवरेज पैक करने वाले कैन के निर्माण की घरेलू क्षमता सीमित है। इसलिए इसका आयात काफी करना पड़ता है। इसके आयात पर पिछले साल कुछ रिस्ट्रिक्शन लगे थे। इस वजह से पिछले साल भी देश में कोल्ड ड्रिंक और बीयर पैक करने वाले कैन की कमी हुई थी। इस साल भी यह समस्या दूर नहीं हुई है। डेढ़-दो महीने बाद होली है, इसलिए अभी से बेवरेज कंपनियों ने तैयारी शुरू कर दी है। इस समय सॉफ्ट ड्रिंक और बीयर बनाने वाली कंपनियां पश्चिम एशियाई देश यूएई और श्रीलंका से कैन का आयात दोगुना कर दिया है।

क्यों हुई कैन की कमी

देश में बियर इंडस्ट्री के संगठन ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) के महानिदेशक विनोद गिरी बताते हैं कि पिछले साल एक अप्रैल से केंद्र सरकार ने बेवरेज कैन में भी क्वालिटी कंट्रोल आर्डर (QCO) लागू कर दिया। इसके बाद एल्युमीनियम कैन भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) सर्टिफिकेशन के दायरे में आ गया है। मतलब कि अब विदेशों से कैन का आयात पहले की तरह नहीं हो पाएगा। उन्हीं कंपनियों के प्लांट से कैन का आयात हो सकेगा, जिनका निरीक्षण बीआईएस कर चुका है। साथ ही कैन निर्माता सामग्री संरचना, ढक्कन, आकार, आयाम, सीम की मजबूती, दबाव प्रतिरोध, रिसाव की रोकथाम, रासायनिक स्थिरता और आंतरिक व बाहरी कोटिंग के पालन पर संशोधित विशिष्ट तकनीकी मानकों को पूरा करते हैं। सर्टिफिकेशन में करीब एक साल का वक्त लगता है।

भारत में कितनी है कैन की खपत

जैसे-जैसे लोगों की लाइफस्टाइल बदल रही है, देश में बेवरेज की मांग लगतार बढ़ रही है। यदि संपूर्ण बेवरेज इंडस्ट्री की बात करें तो हर चौथा व्यक्ति कैन में सॉफ्ट ड्रिंक या बीयर खरीदता है। इस समय कैन सॉफ्ट ड्रिंक और बीयर की कुल वार्षिक बिक्री में 25% की हिस्सेदारी रखती है। यह दो साल में दोगुना हो गया है। इंडस्ट्री के अधिकारियों के अनुसार, इन्हें कांच या पीईटी की बोतलों की तुलना में अधिक आकर्षक, सुविधाजनक और रीसाइक्लिंग के लिए अधिक कुशल माना जाता है।

बीयर तो कैन में ही ज्यादा बिकती है

विनोद गिरी बताते हैं कि भारत में जितनी बीयर बिकती है, उसमें से 85 फीसदी कैन वाली बीयर ही होती है। बोतल में बंद बीयर की हिस्सेदारी महज 15 फीसदी है। कुछ बड़े महानगरों में ताजा ताजा बीयर बना कर भी बेचा जाता है। लेकिन इसकी मात्रा बहुत कम है। BAI ने बताया कि बीयर निर्माताओं को पिछले साल 500 मिलीलीटर के कैन में बीयर की 120-130 मिलियन यूनिट की बिक्री की थी।

क्या चाहती है बेवरेज इंडस्ट्री

बेवरेज इंडस्ट्री चाहती है कि वे जैसे पहले जर्मनी, थाईलैंड, पोलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों से 500 मिलीलीटर के कैन आयात करते थे, उसे अगले साल भर के लिए वैसी ही छूट मिले। उन्होंने सरकार से आयातित कैन के लिए प्रमाणन आवश्यकताओं को एक साल के लिए स्थगित करने का भी आग्रह किया है। उल्लेखनीय है कि इस समय कोला और बीयर निर्माता अपने धातु के कैन का लगभग 20% आयात करते हैं।

घरेलू निर्माता मांग पूरी नहीं कर पा रहे

भारत में ही एल्युमीनियम कैन बनाने वालों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। यहां के प्रमुख सप्लायर बॉल बेवरेज पैकेजिंग इंडिया और कैन-पैक इंडिया, भारत में अपनी विनिर्माण इकाइयों में अधिकतम घरेलू क्षमता तक पहले ही पहुंच चुकी हैं। इन कंपनियों का कहना है कि वे कम से कम 6-12 महीनों तक सप्लई नहीं बढ़ा पाएंगे। वे नई प्रोडक्शन लाइन लगा रहा हैं, जिनमें कुछ समय लगेगा।

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