पुलिस-ट्रेनिंग में जल्द होगी दो नए एआई सिस्टम की एंट्री…:एक परेड और सैल्यूट के तरीके बताएगा, दूसरा दुश्मन के ड्रोन को ध्वस्त करेगा

देश में पहली बार मप्र पुलिस के सिपाही से लेकर डीएसपी तक के पुलिस कर्मचारी-अधिकारियों के लिए जल्द ही आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल की एंट्री हो सकती है। इसके लिए पुलिस ट्रेनिंग स्कूल, भौंरी में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें रक्षा उपकरण बनाने वाली अहमदाबाद की सहाना सिस्टम लिमिटेड के डिफेंस वर्टिकल ने पुलिस अफसरों के सामने प्रेजेंटेशन दिया।

ये कार्यशाला खासतौर पर एआई बेस्ड प्रशिक्षण, स्मार्ट पुलिसिंग, ड्रोन निगरानी और एंटी ड्रोन तकनीकों पर केंद्रित थी। कंपनी ने दो सिस्टम दिखाए, जिनमें से एक परेड के तौर-तरीकों पर नजर रखकर ट्रेनीज की कमियां बताएगी। वहीं दूसरे सिस्टम की मदद से दुश्मन के ड्रोन को ध्वस्त करने की तकनीक बताई गई। इस कार्यशाला की विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।

16-17 जून को भौंरी पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में हुई इस कार्यशाला में प्रदेश के सभी पीटीसी-पीटीएस के चीफ ड्रिल इंस्पेक्टर, ड्रिल इंस्पेक्टर, फिजिकल ट्रेनिंग इंस्पेक्टर, वेपन ट्रेनिंग इंस्पेक्टर्स को बुलाया गया था। एडीजी ट्रेनिंग राजाबाबू सिंह ने बताया कि नई तकनीकों को अपनाने के बाद ऐसा नहीं है कि पुरानी पद्धतियों को भुला दिया जाएगा।

तकनीक और बेसिक तरीकों की मदद से सिपाही से लेकर डीएसपी स्तर के प्रशिक्षुओं को और बेहतर ट्रेनिंग देने की कवायद पर काम किया जा रहा है। इससे पहले सहाना सिस्टम लिमिटेड ने भारतीय सेना के सामने इस तकनीक का प्रेजेंटेशन दिया था। एआई आधारित उपकरणों, रियल-टाइम डेटा विश्लेषण और स्वचालित निगरानी प्रणालियों के इस्तेमाल से अब मप्र पुलिस अपने प्रशिक्षण तंत्र की प्रभावशीलता, दक्षता और अनुकूलन क्षमता को बढ़ा सकेगी। कार्यशाला का संचालन एसपी, पीटीएस, भौंरी रश्मि पांडे ने किया।

ये दो तकनीक बेहद खास

1. ड्रिल मैनेजमेंट सिस्टम बेसिक ट्रेनिंग के दौरान प्रशिक्षुओं को परेड के तौर-तरीके भी सिखाए जाते हैं। इसके तहत सैल्यूट करने के दौरान कितने डिग्री तक हाथ ऊपर उठाना है और चेस्ट अप के लिए सीना कितना आगे निकालना है जैसे तरीके शामिल होते हैं। एआई के जरिए प्रशिक्षुओं को परेड की ये बारीकियां सिखाई जाएंगी। इसमें ग्राउंड पर 15 लोगों के प्रशिक्षण के लिए 42 कैमरे लगाने होंगे।

2. एंटी ड्रोन सिस्टम यह एक वायरलेस सेट जितना बड़ा उपकरण है, जो करीब दो किमी दायरे में घूम रहे ड्रोन को डिटेक्ट कर सकता है। इसके साथ ही एंट्री ड्रोन गन भी आएगी, जिसकी मदद से दुश्मन के ड्रोन का कंट्रोल खुद लिया जा सकता है। इसके जरिए ही दुश्मन के ड्रोन का जीपीएस बंद किया जा सकेगा, इससे वह दुश्मन के पास वापस जाने के बजाए जहां है, वहीं जमीन पर उतर जाएगा।

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