कौन है हिस्ट्रीशीटर जुबैर? AMU टीचर हत्याकांड में रची साजिश, पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) परिसर में कंप्यूटर शिक्षक की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले का पुलिस ने गुरुवार को खुलासा कर दिया। इस सनसनीखेज हत्याकांड की साजिश पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी रहे मुनीर गैंग के करीबी और हिस्ट्रीशीटर जुबैर ने रची थी। हालांकि, जुबैर खुद वारदात के समय मौके पर मौजूद नहीं था, लेकिन उसके दोनों शूटर भाइयों ने शिक्षक को गोलियों से भून डाला। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मुख्य साजिशकर्ता और दोनों शूटर अभी फरार हैं।

मुखबिरी के शक में साजिश

पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2018 में हुए शाहबेज हत्याकांड में जुबैर को जेल जाना पड़ा था। जुबैर को शक था कि एएमयू शिक्षक दानिश राव ने उसके खिलाफ मुखबिरी की थी। इसी रंजिश के चलते उसने शिक्षक की हत्या की साजिश रची। इस साजिश के तहत उसने अपने दो शूटर भाइयों को अलीगढ़ बुलाया और पूरी प्लानिंग के साथ वारदात को अंजाम दिलवाया।

कौन है जुबैर?

जुबैर पश्चिमी यूपी के कुख्यात अपराधी रहे मुनीर का दाहिना हाथ माना जाता था। वर्ष 2018 में आपसी रंगबाजी में एएमयू के हबीब हॉल के पास शाहजेब हत्याकांड में उसका नाम आया। उसकी गिरफ्तारी के लिए सिविल लाइंस थाने से 20 हजार का इनाम घोषित किया गया था। बाद में लूट के एक मामले में दिल्ली पुलिस ने उसे दिल्ली पुलिस ने पकड़ा था। उसे तिहाड़ भेजा गया। पिछले साल जून में उसे अलीगढ़ जेल शिफ्ट किया गया।

जुबैर बरला क्षेत्र के गांव नौसे हाल क्वार्सी का रहने वाला है। उसके भाई यासिर, फहद और सद्दाम के खिलाफ अलीगढ़ और दिल्ली में आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। सद्दाम की पान दरीबा में रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर की हत्या कर लूटी गई सरकारी पिस्टल से जुड़े विवाद में मुनीर एवं जुबैर ने हत्या कर दी थी। मुनीर के जेल जाने के बाद जुबैर ने शहर में उसके गिरोह की कमान संभाली।

24 दिसंबर की रात हुई वारदात

एएमयू टीचर की हत्या की घटना 24 दिसंबर की रात को अंजाम दिया गया। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अमीरनिशा रोड स्थित खयावान हिलाल (कोठी राधा वीडी) हसन मंजिल निवासी दानिश राव को नकाबपोश बदमाशों ने गोली मार दी थी। दानिश एएमयू के एबीके ब्याज हाईस्कूल में कंप्यूटर शिक्षक थे। बदमाश स्कूटी से कैनेडी हॉल के पास पहुंचे। पास आकर कहा कि अब तू पहचानेगा मैं कौन हूं? इसके बाद ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। गंभीर रूप से घायल दानिश को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

सीसीटीवी, कॉल डिटेल से खुली साजिश

घटना के बाद मृतक के भाई डॉ. राव फराज वारिस ने सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। एसएसपी नीरज कुमार जादौन ने पुलिस लाइन में कहा कि हत्याकांड के खुलासे के लिए थाना सिविल लाइन और क्रिमिनल इंटेलिजेंस विंग (नगर) की संयुक्त टीमों का गठन किया गया। जांच के दौरान एएमयू परिसर और आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। इसमें एक संदिग्ध स्कूटी नजर आई। इसके साथ ही पुराने विवादों और सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की गई।

एसएसपी ने कहा कि इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने बीबी बिल्डिंग, अमीरनिशा–गोश्त वाली गली, सिफत रेजीडेंसी निवासी सलमान पुत्र मुतीक कुरैशी को गिरफ्तार किया। पूछताछ और मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) एवं घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर खुलासा हुआ कि वारदात से एक दिन पहले दो संदिग्ध युवक उसके घर आए थे।

सलमान ने कबूला गुनाह

सख्ती से पूछताछ करने पर सलमान ने अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि उसने दोनों शूटर भाइयों को अपने घर में ठहराया था। साथ ही उन्हें घटनास्थल के पास छोड़ने और वारदात के बाद वापस बॉर्डर पार कराने में भी सहयोग किया था। पुलिस अब मुख्य साजिशकर्ता जुबैर और उसके दोनों शूटर भाइयों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा पुलिस कर रही है।

दानिश राव मूल रूप से बुलंदशहर जिले के डिबाई क्षेत्र के रहने वाले थे। उनके ससुर मोहम्मद उल्लाह मुरादाबाद की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रह चुके हैं, जबकि उनके चचिया ससुर फिजा उल्लाह चौधरी मुरादाबाद के जिला पंचायत अध्यक्ष भी रहे हैं। दानिश के भाई एएमयू के इंजीनियरिंग विभाग में शिक्षक हैं। उनकी मां भी शिक्षिका रह चुकी हैं।

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