ईरान के हिंसक विरोध प्रदर्शनों से पड़ोसी पाकिस्तान क्यों डरा, शहबाज शरीफ की दिन-रात नजर, जानें वजह

इस्लामाबाद: ईरान में तेज होते विरोध प्रदर्शन और अस्थिरता बढ़ने के अंदेशे ने पड़ोसी मुल्कों की बेचैनी बढ़ा दी है। इनमें सबसे अहम नाम पाकिस्तान का है, जिसे ईरान की हलचल का असर अपनी जमीन तक पहुंचने का डर सता रहा है। ऐसे में ईरान की स्थिति पर पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार करीब से नजर रख रही है। पाकिस्तान को लगता है कि ईरान में अस्थिरता का उसकी सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिति पर खराब असर होगा। पाकिस्तान और ईरान के बीच 900 किमी से ज्यादा बॉर्डर है। इसमें ज्यादातर पहाड़ी इलाका है, जहां बाड़ेबंदी की कोई खास व्यवस्था नहीं है।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद को लगता है कि ईरानी आबादी का एक हिस्सा सड़कों पर है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘पाकिस्तान इसे ईरान का अंदरूनी मामला मानता है लेकिन सतर्क है। हम स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं। पाकिस्तान सरकार पड़ोसी ईरान में अराजकता नहीं चाहती है।’
क्षेत्रीय अस्थिरता फैलने का डर
रिपोर्ट में पाकिस्तानी अफसर के हवाले से कहा गया है कि तेहरान में लंबे समय तक विरोध जारी रहता है तो पूरे अस्थिरता क्षेत्र में फैल जाएगी।पाकिस्तान उन पहले देशों में से होगा, जिन पर इसका बुरा असर पड़ेगा। ऐसे में पाकिस्तान की नजर तेहरान पर है। पाकिस्तान ने ईरान के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है।
एक्सपर्ट ने बताई चिंता
ईरान में रहने वाले अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ मुहम्मद हुसैन ने द एक्सप्रेस ट्रिब्यून से कहा, ‘मैंने पिछले तीन दशकों में ईरान में चार प्रदर्शन देखे हैं। इतिहास को देखते हुए अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं है कि मौजूदा विरोध प्रदर्शनों से सत्ता परिवर्तन हो सकता है। हालांकि इस बार हथियारबंद प्रदर्शनकारी एक बड़ी चुनौती हैं।’
एक्सपर्ट ये मानते हैं कि अमेरिका और इजरायल का ईरान में दखल पाकिस्तान को मुश्किल राजनयिक स्थिति में डालेगा। ऐसे में पाकिस्तान के सामने ईरान, खाड़ी देशों, चीन और अमेरिका से संबंधों में संतुलन बनाने की चुनौती होगी। ऐसे में इस्लामाबाद की कोशिश है कि पड़ोसी देश ईरान में स्थिरता बनी रहे।





