जिला अदालतों में महिलाओं को मिल रही तारीख पर तारीख…:पेंडेंसी में जबलपुर अव्वल, भोपाल तीसरे नंबर पर

मप्र की जिला अदालतों में महिलाओं और बुजुर्गों को तारीख पर तारीख मिल रही है। इनके मामलों की पेंडेंसी के आंकड़े लाखों में हैं। पूरे प्रदेश की जिला अदालतों में महिलाओं द्वारा किए गए केसों में 1 लाख 92 हजार 278 सिविल और क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं।
वहीं, बुजुर्गों के मामलों में पेंडेंसी का आंकड़ा 1 लाख 6 हजार 362 है। भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर जिले के आंकड़ों की तुलना करें तो महिलाओं के केसों की सबसे ज्यादा पेंडेंसी जबलपुर में है। यहां 17 हजार 654 केस पेंडिंग हैं। वहीं भोपाल तीसरे नंबर पर है जहां 14 हजार 482 मामले पेंडिंग हैं। बुजुर्गों की बात करें, तो इंदौर में सबसे ज्यादा 9617 केस पेंडिंग हैं। भोपाल में 4643 केस बुजुर्गों के पेंडिंग हैं।
महिलाओं और बुजुर्गों के केसों के लिए बने फास्ट्रैक कोर्ट
बुजुर्गों द्वारा दर्ज कराए गए मामलों को चिह्नित किया जाना चाहिए। इन मामलों को बुजुर्गों की उम्र के हिसाब से प्राथमिकता दिया जाए। उनके लिए अलग से फास्ट्रैक कोर्ट बनाई जानी चाहिए। इसी प्रकार महिलाओं के मामलों का भी प्राथमिकता के साथ निपटारा करना चाहिए। इनके लिए भी फास्ट्रैक कोर्ट बननी चाहिए।
क्रिमिनल मामले सबसे ज्यादा इंदौर में : महिलाओं द्वारा दर्ज कराए गए क्रिमनल मामलों में सबसे ज्यादा 8 हजार 703 पेंडेंसी है। भोपाल दूसरे नंबर पर 7 हजार 798 में पेंडेंसी है।
बुजुर्ग ज्यादातर दर्ज करा रहे सिविल मामले : बुजुर्ग के साथ होने वाले मामलों की टोटल पेंडेंसी में से करीब 75 प्रतिशत मामले सिविल के दर्ज होते हैं। वहीं, 25 प्रतिशत मामले ही बुजुर्ग क्रिमिनल के दर्ज कराते हैं।





