बुलेट ट्रेन का ट्रैक कैसे बिछाया जा रहा है, जान लीजिए

गुजरात और दादरा और नगर हवेली (DNH) में 352 किलोमीटर के ट्रैक में से 704 किलोमीटर को ऊंचे पुलों (viaduct) पर बिछाया जाएगा। साथ ही, साबरमती और सूरत में दो बुलेट ट्रेन डिपो भी बनाए जाएंगे। मेक-इन-इंडिया (MII) नीति के तहत पहल करते हुए, कुछ मशीनों का निर्माण अब भारत में भी किया जा रहा है। आईए देखते हैं बुलेट ट्रेन के लिए ट्रैक को कैसे बिछाया जा रहा है।
गुजरात में चल रहा काम
फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन
25 मीटर लंबी 60 किलोग्राम की रेल को आपस में जोड़कर 200 मीटर लंबे पैनल बनाने के लिए फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। अब तक कुल 3 FBWM खरीदी गई हैं। इन मशीनों को सख्त जांच की प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली बुलेट ट्रेनों के लिए रेल वेल्डिंग सही हो सके। रेल वेल्ड फिनिशिंग और रेल वेल्ड टेस्टिंग के लिए JARTS द्वारा प्रशिक्षण पूरा कर लिया गया है।
ऐसे बिछाया जा रहा ट्रैक
200 मीटर लंबे पैनल को रेल फीडर कार का इस्तेमाल करके RC ट्रैक बेड पर लाया और बिछाया जाता है। यह RFC रेल जोड़ी को RC बेड पर धकेल देगा और आरसी पर शुरू में अस्थायी ट्रैक बिछाया जाएगा। अब तक कुल 4 RFC खरीदे जा चुके हैं।





