आरएसएस के प्रशिक्षण शिविर में स्वयंसेवकों को दिया मंत्र, अपने घर से करें पंच परिवर्तन की शुरुआत

 भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ, मध्य क्षेत्र के कार्यकर्ता विकास वर्ग-एक’ के समापन कार्यक्रम में क्षेत्र संघचालक डा. पूर्णेंदु सक्सेना ने कहा कि ‛पंच परिवर्तन’ की सीख घर से प्रारंभ होनी चाहिए। सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, स्वदेशी, पर्यावरण और कुटुम्ब प्रबोधन का वातावरण घर से बनाना होगा। विभिन्न जाति समाज के लोग आपस में संवाद करके आगे की राह बनाएं। शारदा विहार आवासीय विद्यालय के परिसर में बुधवार को आयोजित समापन कार्यक्रम में मंच पर मुख्य अतिथि पूर्व कमांडर इन चीफ अंडमान और निकोबार कमांड वाइस एडमिरल बिमल वर्मा और वर्ग के सर्वाधिकारी सोमकांत उमालकर उपस्थित रहे। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने 20 दिन के प्रशिक्षण में सीखे गए अपने हुनर का प्रदर्शन किया। उन्होंने संचलन, घोष, समता, योग, आसन, नियुद्ध, पदविन्यास और राष्ट्रभक्ति गीत की सामूहिक प्रस्तुति दी।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए करें ध्यान और योग – बिमल वर्मा

कार्यक्रम के दौरान वाइस एडमिरल बिमल वर्मा ने कहा कि भारतीय सशस्त्र सेनाओं में धर्म और जाति का भेद नहीं है। सेना का अपना ही धर्म है। सेना की यूनिटें अलग–अलग प्रांत से आती हैं। सेना की हर यूनिट में सर्वधर्म स्थल का निर्माण किया जाता है। एक ही छत के नीचे सभी धर्मों के श्रद्धा केंद्र रहते हैं। उन्होंने कहा कि अपने देश की सेना के प्रति आरएसएस को बहुत प्यार है। स्वयंसेवकों को सेना की संस्कृति के बारे में आम लोगों को भी बताना चाहिए। उन्होंने शिक्षार्थियों के योग प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हम सबको नियमित योग करना चाहिए। प्रशिक्षण वर्ग में चार प्रांतों के 382 स्वयंसेवकों ने भाग लिया, जिन्हें स्मृति चिह्न के तौर पर आम के सीड बाल भेंट किए गए।

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