ईकोलॉजिकल पार्क में मिले पाषाण युग के औजार, बारिश में मिट्टी बहने से आए नजर

भोपाल। शहर के ईकोलाजिकल पार्क में वर्षा के दौरान मिट्टी बहने से पाषाण के हथियार निकले हैं। इनके आदिमानव काल का होने की संभावना जताई गई है। एक दर्जन ऐसे पत्थर मिले हैं, जो कुल्हाड़ी, भाला जैसे हथियार नजर आते हैं।
पुरातत्व विभाग को दी जानकारी
पुरावशेषों पर शोध करने वाले पुरातत्वविद् डा. नारायण व्यास का मानना है कि ये पत्थर के हथियार आदिमानवों के हो सकते हैं। यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि ये कितने प्राचीन हैं। उन्होंने पाषाण हथियार मिलने की जानकारी पुरातत्व विभाग को दे दी है।
अनायास मिले पत्थर
ये पाषाण हथियार पार्क में डा. व्यास को तब मिले, जब वह वहां पर पौधरोपण करने गए थे। उनका कहना है कि भोपाल विंध्य पर्वतमालाओं से घिरा है। भोपाल व आसपास के क्षेत्रों में मिलने वाले शैलचित्रों व पाषाण युग के पत्थरों से स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र आदिमानव का बसेरा रहा होगा।
यहां भी मिल चुके औजार
डा. व्यास ने बताया कि ईकोलाजिकल पार्क से पहले कलियासोत नदी के आसपास भी पाषाण युग के औजार मिले थे। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने भोपाल सहित देश के अलग-अलग क्षेत्रों में आदिमानव का इतिहास जानने के लिए शोध किए हैं। स्पेन जाकर भी आदिमानवों के संसार का तुलानात्मक अध्ययन किया है। जो पाषाण हथियार मिले हैं, उसे डा. व्यास ने निजी संग्रहालय में रखा है।
संग्रह की यह प्रक्रिया
इसको लेकर सवाल उठने पर सेवानिवृत पुरातत्वविद बीके लोखंडे ने साफ किया कि जमीन की खोदाई के दौरान जो पुरावशेष मिलते हैं, वो धरोहर के रूप भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण व राज्य पुरातत्व को सौंपे जाते हैं। ऐसी संभावित जगहों पर किसी अन्य को खोदाई की अनुमति नहीं होती है। यदि अनुमति से खोदाई की गई तो ऐसे औजार का पता चलने पर पुरातत्व अधिकारियों को सूचना देनी होती है। वहीं ऐसे पत्थरों के औजार जो कहीं जंगल, पार्क, नदी किनारे या फिर कहीं अचानक मिल जाएं, उन्हें पुरातत्वविद निजी तौर पर अपने संग्रहालय में रख सकते हैं। यदि ठीक से नहीं रख पाएं तो शासकीय संग्रहालय को सौंप सकते हैं।
यदि किसी को पाषाण युग के औजार मिलते हैं तो कलेक्टर को सूचित कर इसे पुरातत्व अधिकारियों को सौंप देना चाहिए। इसकी एक कमेटी रहती है, जो इस तरह के औजारों व अवशेषों की जांच करती है।
-उर्मिला शुक्ला, आयुक्त पुरातत्व, मप्र





