अमेरिका की नाक के नीचे तैनात होगा राफेल से लड़ने वाला J-10C फाइटर जेट! चीन और वेनेजुएला में बातचीत, बढ़ेगा तनाव

काराकस: वेनेजुएला और अमेरिका के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। बीते महीने ट्रंप प्रशासन के वेनेजुएला के पास पनडुब्बी और जंगी जहाज तैनात करने से तनाव शुरू हुआ। मंगलवार को हालात युद्ध जैसे हो गए, जब अमेरिका ने वेनेजुएला से निकले जहाज पर हमला किया। इस हमले में 11 लोग मारे गए। वेनेजुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मादुरों ने अमेरिका की आक्रामकता का जवाब देने की बात कही है। साथ ही चीन से J-10C लड़ाकू विमानों की खरीद पर बात शुरू की है। चीन के जेट दुनिया का आधुनिक लड़ाकू विमानों में शुमार है। J-10C से ही पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के राफेल जेट का सामना किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला ने दक्षिण अमेरिका के शक्ति संतुलन में बड़े बदलाव की तैयारी की है। वह चीनी J-10C ड्रैगनबहुउद्देशीय लड़ाकू विमानों की खरीद पर विचार कर रहा है। ऐसा होने पर बीजिंग के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान वॉशिंगटन के बेहद करीब पहुंच जाएंगे। हालांकि विमान खरीद पर दोनों देशों के समझौते की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है।
वेनेजुएला के पास रूसी विमान
वेनेजुएला के मौजूदा लड़ाकू बेड़े में रूस के Su-30MK2 लड़ाकू विमानों का दबदबा है। पश्चिमी प्रतिबंधों और यूक्रेन युद्ध के चलते रूस से वेनेजुएला को नए विमान नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में चीन ने वेनेजुएला को 20 J-10C लड़ाकू विमानों की पेशकश की गई है। वेनेजुएला के जरिए J-10C अमेरिकी प्रभाव को चुनौती देते हुए दक्षिण अमेरिका की सैन्य व्यवस्था को पुनर्गठित कर सकता है।
J-10C से बढ़ी पाकिस्तान की ताकत
चीनी जेट J-10C पाकिस्तान की एयरफोर्स इस्तेमाल कर रही है। चीनी और पाकिस्तानियों का कहना है कि इस जेट ने पाक एयरफोर्स के साथ अपनी उपयोगिता साबित की है। अनुमानित 40 मिलियन डॉलर प्रति विमान की लागत के साथJ-10C वेनेजुएला के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। चीन लोन की सुविधा भी देता है। ऐसे में प्रतिबंधों से जूझते वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था के लिए J-10C आर्थिक रूप से भी व्यवहार्य है।
चीन और वेनेजुएला इस सौदे पर मुहर लगाता है तो दक्षिण अमेरिका के लिए इसके गहरे निहितार्थ होंगे। इस क्षेत्र के वायुशक्ति समीकरण में अमेरिकी प्रभुत्व को कभी चुनौती नहीं मिली है। चीनी विमानों को इस गोलार्ध में उतारकर वेनेजुएला इस यथास्थिति को तोड़ देगा। इससे बीजिंग के लिए अमेरिकी धरती से कुछ ही घंटों की दूरी पर सलाहकारों, तकनीशियनों और ट्रेनिंग यूनिट तैनात करने का रास्ता भी खुल जाएगा।





