स्मार्ट मास्क बताएगा हर सांस में टॉक्सिक गैस का लेवल

ठंड के साथ प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। ऐसे में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), अस्थमा समेत फेफड़ों से जुड़े अन्य रोग के मरीज बढ़े हैं। ज्यादातर में बीमारी की जानकारी तब मिलती है जब व्यक्ति को सांस लने में तकलीफ शुरू हो जाती है। इस स्टेज तक बीमारी शरीर को काफी नुकसान पहुंचा चुकी होती है। जबकि रोग की शुरुआत में ही पहचान हो जाए तो इस समस्या से बचा जा सकता है।

इसी विजन को लेकर IISER के वैज्ञानिकों ने स्मार्ट मास्क तैयार कर रहे हैं। जो हर सांस में टॉक्सिक गैस के लेवल को चेक करेगा। इसके साथ अन्य पैरामीटर पर रिपोर्ट देगा, यदि इनमें बदलाव आएगा तो व्यक्ति के फोन पर अलर्ट जाएगा। जिससे वे सतर्क हो जाएंगे और जरूरी चिकित्सीय सहायता समय पर ले सकेंगे।

इससे बीमारी को शुरुआती दौर में ही रोक दिया जाएगा। मरीजों पर इलाज का खर्च और उससे होने वाली तकलीफ, दोनों में कमी आएगी। जिसका प्रोटोटाइप भोपाल में रीजनल शिक्षा केंद्र में चल रहे राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया गया।

ब्रीथिंग पैटर्न करता है रिकॉर्ड स्टॉल पर मौजूद IISER के स्टूडेंट्स ने बताया कि यह मास्क संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर मित्रदीप भट्टाचार्य द्वारा तैयार किया गया है। वर्तमान में यह मास्क ब्रीथिंग पैटर्न को मॉनिटर करता है। व्यक्ति एक मिनट में कितनी बार सांस ले रहा है, ह्यूमिडिटी का लेवल और ऑक्सीजन के लेवल की भी रीडिंग लेता है। जिसकी रिपोर्ट लाइव फोन में मौजूद एप के जरिए देखी जा सकती है। इसके अलावा एप में डेटा भी कलेक्ट होता रहता है, जो रोग के अर्ली डायग्नोसिस में मदद करेगा।

प्रदेश के स्कूलों में तेजी से बढ़ रही ICT लैब की संख्या राज्य सरकार स्कूलों में तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आईसीटी (इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी) लैब्स का त्वरित विस्तार कर रही है। स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश में वैज्ञानिक और नवाचारी सोच विकसित करना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्राथमिकता में शामिल है। इसी के तहत स्कूलों में डिजिटल लर्निंग, कंप्यूटर लैब्स और स्मार्ट संसाधनों को बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि भविष्य की शिक्षा तकनीक और प्रयोग आधारित होगी, इसलिए बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण और डिजिटल क्षमता प्रदान की जा रही है, जिससे वे वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।

देशभर से चुने गए बाल वैज्ञानिकों का अनूठा संगम एनसीईआरटी निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ने बताया कि राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी देशभर की प्रतिभाओं का अनूठा संगम है। 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए लगभग 900 बच्चे और शिक्षक सामजिक समस्याओं का समाधान बताते 240 वैज्ञानिक मॉडल प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कला और विज्ञान के प्रति गहरी समझ रखते हैं और हमेशा नवाचार को बढ़ावा देते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विज्ञान प्रसारकों, शिक्षकों और विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। यह प्रदर्शनी विद्यार्थियों में जिज्ञासा, शोध भावना और नवाचार की संस्कृति को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच बनी है।

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