अनिल अंबानी की इस कंपनी का शेयर आज फिर फंसा अपर सर्किट में, क्यों आ रही है तेजी?

मुंबई: अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस ग्रुप (Reliance Group) की एक कंपनी है रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर। इसके शेयर गुरुवार को रॉकेट की तरह ऊपर भागे। बीएसई (BSE) पर ये शेयर 5% की अपर सर्किट लिमिट को छूते हुए 165.85 रुपये पर पहुंच गए। यह लगातार दूसरा दिन है जबकि इसके शेयर तेजी के साथ अपर सर्किट में फंसे। इससे पहले इसके शेयर लगातार छह दिनों तक गिरते रहे थे।
एक महीने का प्रदर्शन अभी भी कमजोर
हालांकि, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर में दो दिनों से कुछ सुधार दिख रहा है। लेकिन, पिछले एक महीने का प्रदर्शन अभी भी कमजोर है। इस दौरान शेयर की कीमत करीब 27% गिर चुकी है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 6,454 करोड़ रुपये है। पिछले 52 हफ्तों में यह शेयर 423.40 रुपये के हाई और 149.16 रुपये के लो के बीच रहा है। इसका मतलब है कि शेयर अपने साल के सबसे ऊंचे स्तर से अभी भी करीब 60% नीचे है।
शेयर तो है सस्ता लेकिन…
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर बहुत कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। इसका P/E रेश्यो 2.11 है और P/B रेश्यो 0.26 है। इतने कम मल्टीपल्स अक्सर यह बताते हैं कि शेयर शायद सस्ता मिल रहा है, लेकिन यह कंपनी की अंदरूनी समस्याओं का संकेत भी हो सकता है।
रिलायंस इंफ्रा का टेक्निकल आउटलुक
RSI (14-दिन): 28.8 — 30 से नीचे का RSI बताता है कि शेयर ओवरसोल्ड है, यानी इसकी कीमत बहुत गिर चुकी है। यह छोटी अवधि में वापसी का संकेत दे सकता है।
मूविंग एवरेज: शेयर 8 में से 7 सिंपल मूविंग एवरेज (SMAs) से नीचे चल रहा है। सिर्फ 5-दिन के SMA को छोड़कर, यह बाकी सभी बड़े SMAs के नीचे ट्रेड कर रहा है। यह हाल की उछाल के बावजूद, लंबी अवधि में मंदी का रुझान दिखाता है।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की शेयरहोल्डिंग
प्रमोटर्स ने सितंबर 2025 तिमाही में अपनी हिस्सेदारी 19.05% पर बरकरार रखी है। इसका मतलब है कि उन्होंने अपने शेयर नहीं बेचे या खरीदे। म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी उसी तिमाही में 0.29% से बढ़कर 0.35% हो गई। यह थोड़ी सी बढ़ोतरी बताती है कि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने शेयर में थोड़ा ज्यादा भरोसा दिखाया है। कंपनी में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII/FPI) ने अपनी हिस्सेदारी काफी कम कर दी है। यह 10.26% से घटकर 7.07% रह गई है। यह विदेशी निवेशकों की तरफ से एक बड़ी गिरावट है, जो कभी-कभी कंपनी या बाजार की चिंताओं को दर्शाती है।





