कर्नाटक- मोदी ने 1 लाख लोगों के साथ गीतापाठ किया

बेंगलुरु/पणजी, पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कर्नाटक के उडुपी में श्री कृष्ण मठ में पूजा-अर्चना की। यहां सुवर्ण तीर्थ मंडप का उद्घाटन किया और सोने का कलश चढ़ाया। इसके बाद पीएम ने 1 लाख लोगों के साथ श्रीमद्भगवद गीता का पाठ किया। पीएम सुबह 11 बजे के करीब उडुपी पहुंचे थे। उन्होंने तीन किमी लंबा रोड शो भी किया था।
प्रधानमंत्री शाम को गोवा जाएंगे। वहां कैनाकोना में श्री संस्थान गोकर्ण जीवोत्तम मठ में भगवान राम की 77 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम सुतार ने यह प्रतिमा बनाई है। श्रीराम की यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री एक विशेष स्मारक डाक टिकट और एक सिक्का जारी करेंगे।
पीएम का संबोधन, 4 बड़ी बातें…
- उडुपी आना मेरे लिए बहुत खास है। उडुपी जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के अच्छे शासन के मॉडल की कर्मभूमि रही है। 1968 में उडुपी के लोगों ने जनसंघ के वीएस आचार्य को उडुपी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के लिए चुना था। इसके साथ ही, उडुपी ने एक नए शासन मॉडल की नींव रखी।
- मेरा जन्म गुजरात में हुआ, गुजरात और उडुपी के बीच गहरा संबंध रहा है। यहां स्थापित विग्रह की पूजा द्वारका में माता रुक्मणि करती थी। बाद में ये प्रतिमा यहां स्थापित हुआ। पिछले साल मैं समुद्र के भीतर द्वाराका जी के दर्शन करके आया था।
- हमारे समाज में मंत्रों का और गीता के श्लोकों का पाठ तो शताब्दियों से हो रहा है, पर जब 1 लाख कंठ, एक स्वर में इन श्लोकों का ऐसा उच्चारण करते हैं, जब इतने सारे लोग गीता जैसे पुण्य ग्रन्थ का पाठ करते हैं, जब ऐसे दैवीय शब्द एक स्थान पर एक साथ गूंजते हैं, तो एक ऐसी ऊर्जा निकलती है, जो हमारे मन को, हमारे मष्तिष्क को एक नया स्पंदन और नई शक्ति देती है।
- श्री कृष्ण ने युद्ध के मैदान में गीता का उपदेश दिया था। भगवत गीता हमें सिखाती है कि शांति और सच्चाई को वापस लाने के लिए अत्याचारी का अंत करना जरूरी है। यही नेशनल सिक्योरिटी पॉलिसी का सार है। पहले की सरकारें आतंकी हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई नहीं करती थीं, पर यह नया भारत है। हम शांति स्थापित करना जानते हैं, और उसकी रक्षा भी करते हैं।





