‘ग्लैमर की चकाचौंध एक माया, पल में खत्म’:पॉलिटिक्स पर सिंगर मोहित चौहान बोले- ‘पहाड़ों और देश के लिए जरूर काम करूंगा’

बॉलीवुड के सोलफुल सिंगर मोहित चौहान की आवाज ने ‘डूबा डूबा’, ‘नादान परिंदे’ और ‘सड्डा हक’ जैसे गानों को अमर बनाया। अब वे राजनीति को लेकर खुलकर बातें कर रहे हैं।

पहली बार उन्होंने साफ कहा कि अभी किसी पार्टी का नाम तय नहीं किया है, लेकिन पहाड़ों और देश के लिए काम करना उनकी प्राथमिकता है। ग्लैमर की चकाचौंध दुनिया एक माया है। यह पलभर में खत्म हो जाती है और उसी भ्रम में कई युवा कलाकार अपना रास्ता भटक जाते हैं।

मोहित चौहान ने  बातचीत में अपने संगीत के सफर, ‘सिल्क रूट’ के दिन, जानवरों के प्रति प्रेम, स्ट्रे डॉग्स के लिए काम, ओटीटी सीरीज ‘चमकीला’ और ए.आर. रहमान के साथ काम करने के अनुभवों को बेहद सहज और बेबाक अंदाज में साझा किया। 

भोपाल हिंदुस्तान के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक मोहित चौहान हाल ही में एम्स भोपाल के कार्यक्रम ‘फेस्ट रेटीना 8.0’ में प्रस्तुति देने भोपाल पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वे इससे पहले भी कई बार भोपाल आ चुके हैं और यह शहर उन्हें खासा पसंद है।

भोपाल हिंदुस्तान के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक है। यहां की झीलें शहर की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती हैं। भोपाल बहुत साफ नजर आता है। यही बात मुझे इसे लेकर और ज्यादा आकर्षित करती है। यहां आकर हमेशा अच्छा लगता है।

दिल्ली में स्ट्रे डॉग्स के लिए काम कर रहा हूं, यह हमारा धर्म है सिर्फ संगीत ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति भी मोहित चौहान काफी संवेदनशील हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से स्ट्रे डॉग्स और दूसरे बेसहारा जानवरों के लिए काम कर रहे हैं। उनकी ज्यादातर गतिविधियां दिल्ली में होती हैं।

सिंगर मोहित चौहान ने कहा कि मुझे प्रकृति और जानवरों से हमेशा से लगाव रहा है। हम लोग उनके साथ यह दुनिया साझा करते हैं। वे भी हजारों सालों से हमारे साथ रहते आ रहे हैं। उनकी रक्षा करना और उन्हें अच्छा वातावरण देना हम इंसानों का कर्तव्य है। स्ट्रे एनिमल्स की सेवा करना मुझे अपना धर्म लगता है।

इंडस्ट्री की लाइमलाइट माया, फंसना खतरनाक इंडस्ट्री की लाइमलाइट देखकर कई युवा कलाकार उसमें उलझ जाते हैं, जो उनके करियर को प्रभावित करती है। इस पर मोहित चौहान ने कहा, मुझे लगता है कि जो चकाचौंध होती है, वो एकदम से माया है। वो एक पल में निकल जाती है।

फिर जो लोग उसमें कुछ वक्त के लिए खोए होते हैं, वे बहुत परेशान हो जाते हैं कि वो कहां चली गई। लेकिन वो तो कभी थी ही नहीं वहां पर। वो सिर्फ एक इल्यूजन था। असली जीवन यही है कि जमीन पर रहो, अपना काम करो। अपने लोगों से जुड़े रहो, धरती से जुड़े रहो, अपने काम पर ध्यान दो और सेवा भी कुछ न कुछ करते रहो।

गीत में दर्द तभी उतरता है, जब महसूस करें… मोहित चौहान ने कहा कि यह एक गायक की प्रतिभा है कि यदि वह दर्द भरा गीत गाता है, तो जरूरी नहीं कि वह खुद उस पीड़ा से गुजरा हो, लेकिन वह उस पीड़ा को महसूस कर सकता है। दुनिया में कोई न कोई उस दर्द से गुजर रहा होता है। जब आप उसके प्रति सहानुभूति रखते हुए उस दर्द को अपने भीतर महसूस करके गाते हैं, तभी वो गीत लोगों के दिल को छूता है।

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