गाजियाबाद में नकली Liv-52 बनाने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़, सरगना समेत 5 आरोपी गिरफ्तार

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद पुलिस ने एक बड़े नकली दवा रैकेट का पर्दाफाश किया है जिसमें लीवर की दवाओं की नकली टैबलेट्स बनाई और सप्लाई की जा रही थीं। गिरोह सोनीपत की एक लैब में हिमालयन लिव-52 जैसी नामी दवा की नकली कॉपी तैयार कर रहा था। जांच में पता चला कि आरोपी अलीगढ़, मथुरा, बिजनौर, आगरा, मेरठ और शामली समेत कई जिलों में इन नकली दवाओं की सप्लाई कर चुके हैं। पुलिस ने गैंग के सरगना समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिसमें एक पैरामेडिकल छात्र भी शामिल है। आरोपियों से 50 हजार टैबलेट्स, 1200 सफेद रंग की खाली डिब्बियां और ढक्कन, 500 प्रिंटेड रैपर और एक कार बरामद की गई है।
हिमालयन कंपनी के नाम पर धोखाधड़ी
यह रैकेट हिमालयन वैलनेस कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर अवैध तरीके से नकली टैबलेट्स बेच रहा था। जनवरी में कंपनी की शिकायत पर मुरादनगर थाने में धोखाधड़ी और कॉपीराइट एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था। डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में मोदीनगर के तिबड़ा रोड निवासी मयंक अग्रवाल, दिल्ली के उत्तम नगर निवासी अनूप गर्ग, सुभाषनगर निवासी तुषार ठाकुर, हिंडन विहार निवासी आकाश ठाकुर और निवाड़ी निवासी नितिन त्यागी शामिल हैं। कंपनी के प्रतिनिधियों को अलीगढ़ से फर्जी टैबलेट्स बेचने की सूचना मिली थी, जिसके बाद इस गिरोह का खुलासा हुआ।
मेरठ से बनवाते थे पैकेजिंग सामग्री
आरोपियों ने करीब चार महीने पहले यह धंधा शुरू किया था। वे सोनीपत की सुबको लेबोरेट्रीज से नकली लिव-52 टैबलेट्स बनवाते थे। सफेद डिब्बियां और ढक्कन मेरठ के एकता प्लास्टिक उद्योग के मालिक कमालुद्दीन से, रैपर खैरनगर चौपला के पास मुज्जमिल की प्रिंटिंग प्रेस से और डाई बनाने की मशीन शकील जमनानगर नवीन मंडी से तैयार कराते थे। गिरोह के सदस्यों ने काम बांट रखा था जिसमें नितिन त्यागी का मोदीनगर में मेडिकल स्टोर है, मयंक अग्रवाल पूर्व मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव है, अनूप गर्ग मयंक का रिश्तेदार है, तुषार ठाकुर पैरामेडिकल छात्र है और आकाश ठाकुर सप्लाई में मदद करता था।
ड्रग कंट्रोल विभाग का दावा
ड्रग इंस्पेक्टर आशुतोष मिश्रा ने कहा कि विभाग लगातार नकली दवाओं के खिलाफ एक्शन ले रहा है। हाल के महीनों में कई मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं और आगे भी अभियान चलाए जाएंगे। हालांकि, गाजियाबाद में नकली दवाओं का कारोबार बढ़ता जा रहा है, जो ड्रग विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। शहर लोनी, खेड़ा और इंदिरापुरम जैसे इलाकों में छोटी इकाइयों में कैंसर दवाओं और प्रतिबंधित कफ सिरप जैसी नकली दवाएं बनाई जा रही हैं, जो उत्तर भारत में सप्लाई हो रही हैं।





