दिल्ली की तर्ज पर भोपाल का सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट

भोपाल, भोपाल में बनने वाले नए सेंट्रल विस्टा/स्टेट कैपिटल कॉम्प्लेक्स प्रोजेक्ट ने रफ्तार पकड़ ली है। सामान्य प्रशासन विभाग ने एक उच्च स्तरीय बैठक में इस योजना के प्राथमिक स्वरूप पर सहमति दे दी है। बैठक में हाउसिंग बोर्ड को 4 महीने यानी, 30 जून के पहले डीपीआर यानी, डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट फाइनल करने को कहा है।

बोर्ड ने सेंट्रल विस्टा की डिजाइन और डीपीआर के लिए टेंडर के माध्यम से आर्किटेक्ट भी फाइनल कर दिया है। वल्लभ भवन, हमीदिया हॉस्पिटल, जेएनयू दिल्ली जैसे संस्थान डिजाइन करने वाली फर्म मेसर्स सीपी कुकरेजा सेंट्रल विस्टा बना रही है। प्रस्तावित नया प्रोजेक्ट लगभग 1 हजार करोड़ रुपए का है।

कॉरपोरेट की तरह हाईटेक होगा ऑफिस

सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी सरकारी विभागों को पत्र लिखकर उनकी ऑफिस की जरूरतों और स्थानांतरण को लेकर जानकारी मांगी थी। अभी तक की जानकारी के मुताबिक, सामान्य प्रशासन विभाग को 58 विभाग के 84 कार्यालयों से पत्र प्राप्त हुए हैं। 33 विभाग के 59 कार्यालय सेंट्रल विस्टा में स्थानांतरण के इच्छुक हैं। इन विभागों ने कुल 1 लाख तीन हजार वर्ग मीटर जगह मांगी है।

बाकी 6 कार्यालय रेनोवेशन और प्रस्तावित भवन के कारण सहमत नहीं है। 19 अन्य के अपने स्वतंत्र और पर्याप्त ऑफिस हैं। हालांकि, जिन भी ऑफिस में रेनोवेशन या र्निमाण कार्य शुरू नहीं हुआ है, उन सबको रोका जा सकता है।

किसी को भी नई जमीन नहीं आवंटित की जाएगी। उन सभी को सेंट्रल विस्टा में ही जगह दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट में सभी आधुनिक तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कॉरपोरेट की तरह यह हाईटेक ऑफिस होगा।

वर्तमान से दोगुना होगा ऑफिस स्पेस

पुराने हो चुके सतपुड़ा और विंध्याचल भवन की जगह नया सेंट्रल विस्टा बनेगा। पुराने दोनों भवनों का निर्मित क्षेत्रफल 76 हजार 500 वर्ग मीटर है। नए सेंट्रल विस्टा में लगभग दोगुना यानी 1.60 लाख वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्रफल होगा। नई योजना में वल्लभ भवन की वास्तुकला को ध्यान मं रखते हुए 12 नए टॉवर बनाने की योजना है।

तापमान कम रहेगा और सोलर बिजली भी बनेगी

नए प्रस्तावित डिजाइन में सभी 12 टॉवर की छत को जोड़कर एक परगोला बनाने का प्रस्ताव है। इससे पूरे परिसर का ताप कम रहेगा और सोलर बिजली भी उत्पन्न की जाएगी। हालांकि, साधिकार समिति ने इस परगोला को बनाने में आने वाले खर्च का डिटेल मांगा है।

अगले 50 वर्षों की आवश्यकतानुसार होगी पार्किंग की व्यवस्था

प्रस्तावित नए प्रोजेक्ट में पार्किंग को लेकर विशेष ध्यान दिया है। नए टॉवरों में अगले 50 वर्ष की आवश्कतानुसार पार्किंग बनाया जाएगा। वल्लभ भवन में अधिकारियों के लिए निर्धारित पार्किंग को तोड़कर टॉवर 1 व 2 का काम शुरू होना है।

वर्तमान से 4 गुना ज्यादा होगा ग्रीन एरिया

नए सेंट्रल विस्टा में ग्रीन एरिया को 4 गुना ज्यादा बढ़ाया गया है। नए प्लान में ग्रीन एरिया 5.84 हेक्टेयर से बढ़ाकर 22.46 हेक्टेयर किया जा रहा है।

मेट्रो स्टेशन से आने-जाने के लिए कवर्ड फुटपॉथ

प्रस्तावित प्रोजक्ट में आसपास के मेट्रो स्टेशन से कवर्ड पाथ-वे, हॉकर्स कॉर्नर और टॉयलेट भी बनाए जाएंगे। दूर से आने वाले आम लोगों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का भी प्रावधान किया जाएगा। मौजूदा सड़कों का चौड़ीकरण व सौन्दर्यीकरण कर इन पर फुटपाथ बनेगा।

एमपी हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर गौतम सिंह ने बताया

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प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आम नागरिकों की सुविधा के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। मप्र शासन की मंशा के अनुरूप बोर्ड इस पर तेजी से काम कर रहा है।

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क्या है स्टेट कैपिटल कॉम्प्लेक्स/ सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट राजधानी में अभी ज्यादातर सरकारी ऑफिस अलग-अलग जगहों पर स्थित हैं। शासकीय विभागों की कार्य आवश्यकता, नई भर्ती, पुराने और जर्जर हो गए कार्यालयों की वजह से विभागों को नए ऑफिस की जरूरत है।

इस आवश्यकता को देखते हुए मप्र शासन नई दिल्ली स्थित सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर सतपुड़ा और विंध्याचल भवन की जगह पर एक नया प्रशासनिक केंद्र बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

भोपाल स्थित सेंट्रल विस्टा में ज्यादातर सरकारी ऑफिस व्यवस्थित और आधुनिक रूप में एक जगह होंगे। जिससे प्रशासनिक कार्य सुविधा के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए भी यह सुविधाजनक होगा।

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